दानपुर। प्रेमावतार, युगदृष्टा, श्री हरि कृपा पीठाधीश्वर व विश्व विख्यात संत स्वामी श्री हरि चैतन्य पुरी जी ने दानपुर में उपस्थित विशाल भक्त समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि सत्संग का प्रकाश हमारे अंतर्मन को प्रकाशित करता है और हमें भी उस ज्ञान रूपी प्रकाश को अपने अंतर मन में धारण कर परमपिता परमेश्वर को पाने का प्रयास करना चाहिए। मगर जब तक सत्य का संग नहीं होगा सत्संग से भी कोई लाभ प्राप्त हो नहीं सकेगा। जिस प्रकार सूरज की किरणें हमें तब तक लाभ नहीं पहुंचा सकती जब तक कि हमारे घरों की खिड़की दरवाजे बंद रहेंगे।ठीक उसी प्रकार हम गुरु व परमात्मा की कृपा के अधिकारी तभी बन सकते हैं जबकि हम उनके द्वारा दिए गए ज्ञान रूपी प्रकाश को अपने अंतर्गत में उतारेंगे।
उन्होंने कहा कि दृढ़ता,संयम,त्याग व तद्नुकुल आचरण इन चारों के एकत्रित होने पर ही सफलता प्राप्त होती है। योग्यता से अधिक महत्वकांक्षी नहीं होना चाहिए। कामनाओं को सीमित करें इनका कोई अंत नहीं। यह हृदय को पीड़ित करती हैं। सच्चा भाव ही सच्ची उपासना है। सच्चे हृदय से प्रेम व श्रद्धा पूर्वक की गई प्रार्थना को परमात्मा अवश्य ही सुनते हैं। चाहे व्यक्ति को वेद,शास्त्र, पुराणों का ज्ञान चाहे ना हो । आज हमारी,हमारे परिवार की देश की व समाज की जो दुर्दशा हो रही है विभिन्न प्रयास करने के बावजूद जिससे हम उबर नहीं पा रहे। प्रयास के साथ-साथ प्रभु से उनकी कृपा की याचना से परिपूर्ण भाव सहित प्रार्थना भी करनी चाहिए ।
उन्होंने कहा कि सच्चा संत व महात्मा न तो अपने को संत और महात्मा मानता है ना घोषित करता है, और ना दूसरों के द्वारा कहे जाने पर उसे स्वीकार करता है। विनम्र या नम्रता की दृष्टि से नहीं,वह सर्वत्र भगवान की महिमा को देखते हैं और उसी में सहज स्थित रहता है, वह त्याग का भी त्यागी होता है, किसी प्रकार के गर्प, दर्प, अभिमान उसके पास फटक नहीं सकते। साधु का वेष बनाकर भी समाज को धोखा देना महापाप है। उन्होंने कहा कि जगत की यथा सामर्थ्य सेवा तथा परमात्मा व संतों से प्रेम करो। संतो, शास्त्रों व अवतारों को मात्र अपनी कमियां छुपाने की ढाल ही ना बनाएं उनसे प्रेरणा शिक्षाएं उपदेश भी ग्रहण करके अपने जीवन में उतारे।
उन्होंने कहा कि अधर्माचरण करने वाले कुमार्गगामी लोगों का संग त्यागकर, जितेंद्रिय, श्रेष्ठ महापुरुषों का संग व उनकी सेवा करके अपने जीवन को कल्याणमय बनाएं। क्योंकि सत्पुरुषों का आचरण व कार्य सदैव अनुकरणीय होता है।
अपने धारा प्रवाह प्रवचनों से उन्होंने सभी भक्तों को मंत्रमुग्ध व भाव विभोर कर दिया। सारा वातावरण भक्तिमय हो उठा व “श्री गुरु महाराज” “कामां के कन्हैया”व “लाठी वाले भैय्या” की जय जयकार से गूँज उठा।
यहां पहुँचने से पूर्व हल्द्वानी, मोटाहल्दू, किच्छा, लालपुर, रूद्रपुर में पधारने पर स्थान स्थान पर बड़ी संख्या में हरि भक्तों ने परम पूज्य श्री महाराज जी का हार्दिक भव्य स्वागत किया । श्री महाराज जी के दर्शनों व अमृत वचनों को सुनने के लिए दिनभर भक्तों का ताँता लगा रहा। हर स्थान पर श्री महाराज जी का अग्रिम जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया व विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया ।
ख़बर शेयर करें – खबर सच है संवाददाता देहरादून। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उत्तराखंड के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुनील कुमार मीणा को विशिष्ट कार्य के लिए मुख्यमंत्री सराहनीय सेवा पदक से सम्मानित किया गया।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। यह सम्मान उनके […]
ख़बर शेयर करें – खबर सच है संवाददाता रुद्रपुर। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर रुद्रपुर के ट्रांजिट कैंप थाना क्षेत्र के श्याम टॉकीज इलाके में डीजे के साथ निकले जुलूस में कुछ युवको द्वारा कथित तौर पर तलवार और अन्य धारदार हथियार लहराते नजर आए वायरल वीडियो के बाद पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी […]
ख़बर शेयर करें – खबर सच है संवाददाता हरिद्वार। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी, हरिद्वार कार्यालय परिसर में ध्वजारोहण कर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. स्वास्तिक सुरेश एवं राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ, हरिद्वार के अध्यक्ष डॉ. […]