सम्पादकीय
राजनीति का गिरता स्तर : विचारों की लड़ाई से शुद्धिकरण और पुतला दहन तक
मनोज कुमार पाण्डे ✍️ हल्द्वानी का रामलीला मैदान इन दिनों राजनीतिक टकराव का प्रतीक बन गया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद तथाकथित भाजपा समर्थित हिन्दू नेताओं द्वारा सभा स्थल के शुद्धिकरण का मामला सामने आया। इसके बाद आरोप-प्रत्यारोप, प्रशासनिक कार्रवाई, धरना-प्रदर्शन, गिरफ्तारी की मांग और […]
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जब सवालों ने शोर को हराया: ईश्वर, तर्क और सभ्य संवाद की एक दुर्लभ बहस
कमल किशोर पाण्डे (उप सम्पादक) 20 दिसंबर 2025 को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुई जावेद अख्तर और मुफ्ती शमाइल नदवी के बीच की बहस केवल “क्या खुदा है?” जैसे एक दार्शनिक प्रश्न तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह हमारे समय के बौद्धिक स्तर, संवाद की संस्कृति और असहमति को व्यक्त करने के […]
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घुघुति त्यार और कौवे की पुकार : कुमाऊँ का लोकबोध
कमल किशोर पाण्डे (उप सम्पादक) “खबर सच है” कुमाऊँ की पर्व-परंपराएँ केवल तिथि-आधारित उत्सव नहीं हैं, वे प्रकृति, ऋतु और जीवन के साथ मनुष्य के संवाद की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। मकर संक्रांति, जिसे कुमाऊँ अंचल में उत्तरायणी या घुघुति त्यार कहा जाता है, इसी संवाद का सबसे कोमल और […]
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शिकागो से आज तक: विवेकानंद और हमारा वर्तमान
कमल किशोर पाण्डे (उप सम्पादक) “खबर सच है” स्वामी विवेकानंद द्वारा 11 सितंबर 1893 को विश्व धर्म संसद, शिकागो में दिया गया यह भाषण भारत की आध्यात्मिक चेतना, सहिष्णुता और वैश्विक मानवता का ऐतिहासिक उद्घोष था। यह केवल एक भाषण नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का विश्वमंच पर आत्मविश्वासपूर्ण परिचय था। प्रस्तुत […]
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चीन-विरोध का शोर और चीनी निर्भरता का सच
कमल किशोर पाण्डे (उप सम्पादक) “खबर सच है” चीन को दुश्मन बताने का शोर जितना ऊँचा हुआ, चीन पर निर्भरता उतनी ही गहरी होती चली गई। यह विरोधाभास नहीं, यह खुला दोगलापन है। सीमा पर टकराव, शहादत और राष्ट्रवाद की आड़ में जनता को भावनात्मक रूप से लामबंद किया गया, जबकि बंदरगाहों […]
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छात्र राजनीती या फिर गुंडा तैयार करने की पाठशाला
मनोज कुमार पांडे उत्तराखंड में लिंगदोह कमेटी की सिफारिशो के बावजूद छात्र संघ चुनाव गुंडागर्दी का अखाड़ा बन कर रह गया है। जहां लगातार हिंसा की घटनाएं सामने आ रही हैं। चुनाव के दौरान कभी छात्र गुट कॉलेज परिसर पर भीड़ जाते है तो कभी कॉलेज परिसर से बाहर सरफुटब्बल की नौमत आ जाती […]
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हाकम के हाकिम तक कब पहुंचेगी एसआईटी
हाकम क्या अपने पांव चल रहा था या फिर उसको चलने की व्हील चेयर सत्ता पर काबिज हाकिम ने उपलब्ध कराई थी। हर रोज हाकम एक, हाकम दो, हाकम अट्ठाइस एसआईटी के मेहमान बन रहे है, लेकिन हाकम चार सौ बीस का सिग्नल एसआईटी की रडार पर नहीं आ रहा। जबकि हाकिमों की कोल्ड […]
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