शिक्षक दिवस: जब एक शिक्षक की पहचान बनी राष्ट्र की प्रेरणा 

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मनोज कुमार पाण्डे ✍️
 
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥”
 
शिक्षक केवल वह व्यक्ति नहीं, जो हमें किताबों के पन्ने पढ़ाता है। शिक्षक वह होता है, जो अज्ञान से ज्ञान की ओर, भ्रम से विवेक की ओर और असफलता से संघर्ष की ओर बढ़ना सिखाता है। इसी भावना को सम्मान देने के लिए भारत में हर वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है।
 
5 सितंबर का दिन भारत के महान दार्शनिक, शिक्षाविद और देश के दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती भी है। उनका जन्म 5 सितंबर 1888 को हुआ था। वे राष्ट्रपति पद तक पहुंचे, लेकिन शिक्षक की पहचान उनके व्यक्तित्व से जीवनभर जुड़ी रही। राष्ट्रपति भवन तक पहुंचने के बाद भी उनके लिए शिक्षा और शिक्षक का महत्व कम नहीं हुआ। 
 
जन्मदिन को उत्सव नहीं, शिक्षकों के सम्मान का दिन बनाया
 
कहा जाता है कि 1962 में डॉ. राधाकृष्णन के राष्ट्रपति बनने के बाद उनके विद्यार्थियों और प्रशंसकों ने उनका जन्मदिन मनाने की इच्छा व्यक्त की। इसके बजाय उन्होंने अपने जन्मदिन को व्यक्तिगत उत्सव बनाने के स्थान पर शिक्षकों के सम्मान के लिए समर्पित करने की भावना व्यक्त की। इसी से भारत में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की परंपरा स्थापित हुई। 
यह प्रसंग अपने आप में बताता है कि डॉ. राधाकृष्णन के लिए शिक्षक होना केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज निर्माण का दायित्व था।
 
शिक्षक—जो भविष्य की नींव रखता है
 
एक डॉक्टर किसी व्यक्ति का इलाज करता है, इंजीनियर इमारतें और पुल बनाता है, वैज्ञानिक नई संभावनाओं के द्वार खोलता है, लेकिन इन सभी के पीछे कहीं न कहीं एक शिक्षक की भूमिका होती है। एक शिक्षक बच्चे को केवल यह नहीं बताता कि क्या पढ़ना है, बल्कि यह भी सिखाता है कि क्यों पढ़ना है, कैसे सोचना है और सही-गलत के बीच अंतर कैसे करना है। आज तकनीक ने ज्ञान को हमारी उंगलियों तक पहुंचा दिया है। मोबाइल और इंटरनेट पर कुछ सेकंड में हजारों जानकारियां मिल जाती हैं। लेकिन जानकारी और ज्ञान में अंतर समझाने वाला शिक्षक आज भी उतना ही जरूरी है।
 
बदलते समय में शिक्षक की भूमिका और बड़ी हुई
 
आज का विद्यार्थी पहले की तुलना में कहीं अधिक सवाल पूछता है। उसके सामने किताब के साथ इंटरनेट, सोशल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तमाम डिजिटल माध्यम मौजूद हैं। ऐसे समय में शिक्षक की भूमिका केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं रह सकती।आज शिक्षक को विद्यार्थियों में तर्क, संवेदनशीलता, अनुशासन, रचनात्मकता और जिम्मेदारी जैसे गुण विकसित करने होंगे। क्योंकि देश का भविष्य केवल अच्छे अंक लाने वाले विद्यार्थियों से नहीं बनेगा, बल्कि ऐसे युवाओं से बनेगा जो कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय ले सकें और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझें।
 
सम्मान केवल एक दिन क्यों?
 
शिक्षक दिवस पर स्कूलों में कार्यक्रम होते हैं, विद्यार्थी अपने शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हैं और कईजगह शिक्षक की भूमिका भी निभाते हैं। यह परंपरा सुखद है, लेकिन शिक्षक के सम्मान को केवल 5 सितंबर तक सीमित कर देना पर्याप्त नहीं है। किसी शिक्षक के लिए सबसे बड़ा सम्मान शायद कोई महंगा उपहार नहीं, बल्कि उसका वह विद्यार्थी है जो वर्षों बाद भी अपने शिक्षक को याद रखता है और कहता है— “आपने मुझे केवल पढ़ाया नहीं, मुझे बेहतर इंसान बनना सिखाया।” यही किसी शिक्षक की वास्तविक उपलब्धि है।
 
डॉ. राधाकृष्णन की विरासत का संदेश
 
डॉ. राधाकृष्णन का जीवन हमें यह समझाता है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के भीतर विचार और विवेक को जन्म देना भी है। उन्होंने दर्शन, शिक्षा और सार्वजनिक जीवन—तीनों क्षेत्रों में अपनी गहरी छाप छोड़ी। भारत के राष्ट्रपति के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार वे 13 मई 1962 से 13 मई 1967 तक देश के दूसरे राष्ट्रपति रहे। 
 
भारत में 5 सितंबर का शिक्षक दिवस जहां डॉ.राधाकृष्णन की स्मृति और शिक्षक समुदाय के सम्मान से जुड़ा है, वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्व शिक्षक दिवस 5 अक्टूबर को मनाया जाता है। यूनेस्को के अनुसार यह दिवस 1994 से मनाया जा रहा है और इसका संबंध 1966 में अपनाई गई ILO/UNESCO की शिक्षकों की स्थिति संबंधी सिफारिश से है। 
 
शिक्षक को सलाम
 
शिक्षक वह दीपक है जो स्वयं जलकर दूसरों के जीवन में उजाला करता है। वह विद्यार्थी के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानता है, गलतियों पर रोकता है, असफलता में हौसला देता है और सफलता के समय जमीन से जुड़े रहने की सीख देता है। इसलिए शिक्षक दिवस केवल बधाई देने का दिन नहीं, बल्कि उस व्यक्तित्व के प्रति कृतज्ञ होने का अवसर है जिसने हमारे जीवन की दिशा बदलने में कहीं न कहीं भूमिका निभाई।
 
आज शिक्षक दिवस पर उन सभी गुरुजनों को नमन, जिन्होंने अक्षरों से आगे बढ़कर जीवन पढ़ना सिखाया।
शिक्षक हैं तो संस्कार हैं,
शिक्षक हैं तो विचार हैं,
शिक्षक हैं तो भविष्य है।
शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
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