प्राकृतिक सौंदर्य, स्वच्छ वातावरण और शांत वादियों के लिए विश्वभर में पहचान रखने वाला उत्तराखण्ड आज कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। लगातार बढ़ते पलायन, अनियोजित पर्यटन, वाहनों की बढ़ती संख्या, सड़कों पर लगने वाले जाम और पर्यटकों द्वारा फैलाए जा रहे कचरे ने देवभूमि की पहचान को प्रभावित किया है।
एक ओर सरकार इसे पर्यटन क्षेत्र की उपलब्धि और आर्थिक प्रगति के रूप में प्रस्तुत करती है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोग पर्यावरणीय असंतुलन, संसाधनों पर बढ़ते दबाव और बदलती सामाजिक संरचना को लेकर चिंतित हैं।
क्या उत्तराखण्ड विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है या फिर अंधाधुंध पर्यटन इसके प्राकृतिक स्वरूप और अस्तित्व के लिए खतरा बनता जा रहा है? इसी महत्वपूर्ण विषय पर देखिए हमारी विशेष रिपोर्ट।
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