चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले के नंदानगर ब्लॉक में प्राकृतिक आपदा ने कहर बरपाया है। 17 सितंबर की रात अतिवृष्टि के बाद हुए भूस्खलन और मलबे की चपेट में कई मकान आ गए। लोग अपने घरों में सो रहे थे कि अचानक आई तबाही ने कई जिंदगियां लील लीं।
कहते है न कि विधाता के विधान के आगे कुछ नहीं, उसने अगर जीवन लिखा है तो मौत भी कुछ नहीं कर सकती। ऐसा ही इस आपदा के बीच कुंतरी लगा फाली गांव में हुआ एक चमत्कार लोगों के लिए उम्मीद की किरण बन गया। यहां मलबे में दबे कुंवर सिंह को एनडीआरएफ,एसडीआरएफ और स्थानीय लोगों की मदद से 16 घंटे बाद जीवित बाहर निकाला गया। हालांकि उनकी पत्नी और दो बेटे अब भी मलबे के नीचे दबे हैं, जिन्हें निकालने कीकोशिशें जारी हैं।
रेस्क्यू टीम हथौड़े, औजार और कटर मशीन की मदद से छत काटकर भीतर तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जवानों का कहना है कि मलबे की हर ईंट के पीछे एक जिंदगी की उम्मीद छिपी है। अब तक मलबे से पांच शव बरामद हो चुके हैं। इनमें तीन शव 19 सितंबर कोनिकाले गए, जिनमें एक महिला और दो पुरुष शामिल हैं, जबकि 18 सितंबर को दो शव बरामद हुए थे।
सरपाणी और धुर्मा गांव भी इस तबाही की चपेट में आए हैं। कई लोग तो भागकर बच निकले, लेकिन कुछ को मौका तक नहीं मिला। प्रशासन और राहत दल लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे हुए हैं।
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