27 फरवरी से 15 जून तक आयोजित उत्तर भारत के प्रमुख धार्मिक आयोजन में पहली बार होगा होलिया से पूर्व शुभारंभ
चम्पावत। उत्तर भारत के प्रमुख आस्था केंद्र पूर्णागिरि मंदिर का वार्षिक मेला इस वर्ष 27 फरवरी (होलिया एकादशी) से प्रारंभ होकर 15 जून तक कुल 109 दिनों तक आयोजित किया जाएगा। पहली बार मेले की शुरुआत होली से पूर्व की जा रही है, जिससे श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
जिलाधिकारी मनीष कुमार ने मेला क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया।उन्होंने निर्देश दिए कि मेले में आने वाले प्रत्येक तीर्थयात्री का स्वागत “मेहमान” की तरह किया जाए, ताकि यहां आने वाला हर श्रद्धालु जिले का “ब्रांड एंबेसडर” बनकर लौटे और मेले की सकारात्मक छवि देशभर में पहुंचे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा मेले को वर्षभर आयोजित किए जानेकी घोषणा के बाद मां पूर्णागिरि के भक्तों में संतोष और उत्साह की लहर है। अब तक जिला पंचायत द्वारा मेला व्यवस्थाएं लगभग तीन से साढ़े तीनमाह तक संचालित की जाती थीं जबकि श्रद्धालुओं का आगमन वर्षभर (बरसात को छोड़कर) बना रहता है। तीर्थ यात्रियों का कहना है कि विस्तारित मेला व्यवस्था से उन्हें अपनी सुविधा के अनुसार दर्शन का अवसर मिलेगा।
मेला क्षेत्र में सुरक्षा और सुविधा को लेकर व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं।पूरे क्षेत्र में सीसीटीवी सर्विलांस सिस्टम स्थापित किया जाएगा ताकि व्यवस्थाओं पर सतत निगरानी रखी जा सके। यात्रा मार्ग पर पेयजल, प्रकाश और साउंड सिस्टम की समुचित व्यवस्था रहेगी। चिकित्सा शिविरों में एम्बुलेंस, जीवनरक्षक दवाएं, ऑक्सीजन तथा मोबाइल केयर यूनिट तैनात रहेंगी और एसडीआरएफ की टीम भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहेगी।
पहली बार ककराली गेट से मुख्य मंदिर क्षेत्र तक स्वच्छता एवं शौचालय व्यवस्था को सौंपी गई है। यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित रखने के लिए टैक्सियों का किराया निर्धारित किया जाएगा तथा ओवर लोडिंग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।ठूलीगाड़ से भैरव मंदिर तक लगभग पांच दर्जन टैक्सियों का संचालन किया जाएगा। भंडार स्थलों में इंटरलॉक टाइलें बिछाई गई हैं और पुलियों की मरम्मत का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। मेला क्षेत्र विद्युत प्रकाश से जगमग रहेगा।बैठक में एसडीएम सदर अनुराग आर्य, जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी कमलेश बिष्ट सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। टनकपुर में एसडीएम का पद रिक्त होने के कारण अतिरिक्त दायित्व चम्पावत के एसडीएम सदर को संभालना पड़ रहा है, ऐसे में मेले की विशालता को देखते हुए स्थायी तैनाती की आवश्यकता भी महसूस की जा रही है।
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