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सम्पादकीय

छात्रसंघ नहीं, सियासत का अखाड़ा : सत्ता की खनक, संगठन की ताकत और धनबल के बीच निर्दलीय ने बिगाड़ा राजनीतिक दलों का खेल 

मनोज कुमार पाण्डे    छात्रसंघ चुनाव था… लेकिन जिस तरह इस चुनाव में राजनीतिक दलों और उनसे जुड़े संगठनों ने अपनी ताकत झोंकी, उसे देखकर सवाल उठना स्वाभाविक है—क्या यह वास्तव में छात्रों का चुनाव था या राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का एक और अखाड़ा? छात्रों के मुद्दे पीछे छूट गए।   रोजगार, शिक्षा की गुणवत्ता, […]

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