the question remains alive: Has the Uttarakhand of the martyrs’ dreams been realized? राज्य आंदोलन के 32 साल

सम्पादकीय

32 साल बाद भी सवाल जिंदा है—क्या शहीदों के सपनों का उत्तराखण्ड बन पाया?

    ✍️मनोज कुमार पाण्डे   1 सितंबर 1994… उत्तराखण्ड के इतिहास का वह दिन, जिसे याद करते ही आंखों के सामने आंदोलन, संघर्ष, गोलियों की आवाज और अपने पहाड़ के लिए सब कुछ न्योछावर कर देने वाले आंदोलनकारियों की तस्वीर उभर आती है। खटीमा गोलीकांड से लेकर मसूरी और मुजफ्फरनगर तक राज्य आंदोलन की […]

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