शासन तंत्र की निष्क्रियता के चलते राज्य का समुचित विकास बाधक।

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मनोज कुमार पाण्डे
संपादक “खबर सच है”

विकास की सार्थक पहल का खोखला नारा देने वाली राज्य सरकार आखिर अपनी गिरगिट चाल चलने में कामयाब रही है। राज्य की यह दुर्दशा शायद आज पहली बार देखने को मिल रही। सड़क, यातायात, रोजगार शायद कोई भी ऐसा पहलू नहीं जिसमें सरकार, जनता के समक्ष अपने को सही साबित कर सकती। महत्वपूर्ण बात तो यह है कि जिस सरकार के प्रतिनिधि थाली के बैगन की तरह लुढ़कने को तैयार बैठे हो और अंदर ही अंदर रस्सा-कसी में लगे हो, आखिर उस सरकार अथवा उसके शासन में कोई उम्मीद कैसे की जा सकती है।

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एक आदर्श राज्य का निर्माण, प्रत्येक युवा को रोजगार एवं महिलाओं के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाये जायेंगे, राज्य में लघु एवं कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जायेगा, औद्योगिक क्रांति के लिए ठोस रणनीति तय की जायेगी तथा और भी कई खोखले वायदे देने वाली वर्तमान राज्य सरकार भूल गई अपने चुनावी वायदे। आखिर कहां गये वो सभी चुनावी वायदे? आद्योगिक क्रांति तो सम्भव नही हो सकी, वरन उद्योगों में ब्याप्त भ्रष्टाचार के नाम पर गड़े मुर्दे उखाड़ने में ही राज्य सरकार ध्यान केंद्रित रहा। हां अगर कुछ नया हो भी रहा है तो औद्योगिक नीति के चलते आवासीय अथवा कृषि क्षेत्रों को उजाड़ने का कार्य अवश्य हुआ है।

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अस्पष्ट तकनीकी एवं शैक्षिक प्रणाली के चलते युवाओँ को अपना भविष्य अंधकारमय नजर आने लगा है।दूरदराज के क्षेत्रों में चल रहें विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षणोत्तर कर्मचारी नहीं। सीमांत क्षेत्रों में आज तक बिजली-पानी की समुचित ब्यवस्था नहीं। आज भी इन क्षेत्रों की महिलाएं दूर-दूर से सिर पर पानी ढोती दिखाई पड़ती है। उबड़-खाबड़ रास्तों पर पैदल मिलों लम्बा सफर तय करके आज भी यहां के छात्रों को शिक्षालय पहुँचना पड़ता है। चिकित्सालयों के न होने के कारण मरीज शहर पहुचने से पहले ही दम तोड़ देता है। संरक्षण के लिए बनी कानून ब्यवस्था या तो स्वयं के स्वार्थ में लिप्त है या फिर नेताओं की चाटूकारिता में। सच तो यह है कि प्राकृतिक रूप से खूबसूरत इस राज्य में आज भी कई ऐसे अविकसित क्षेत्र हैं जहां की जनता शासन की पूंजीवादी और एकतरफा न्यायिक ब्यवस्था के चलते सड़कों पर आने को मजबूर है।

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