“कितने चेहरों से उतर गए आज मुफ़लिसी के नकाब,कल तक जो कहते रहे देंगे रोटी आज पिला रहे शराब।”

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मनोज कुमार पाण्डे

यह बिडम्बना ही है कि पृथक राज्य बनने के बाद भी उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश के नक्शे कदम पर ही अग्रसित रहा है। यूपी बन्द तो उत्तराखंड बन्द और यूपी में ढील तो उत्तराखंड के आलाहुजुर के भी तेवर नरम पड़ गए। ब्यापारियों के थाली बजाने, गिरफ्तारी देने यहां तक की भीख मांगने के बाद भी प्रदेश सरकार का दिल नहीं पसीजा, लेकिन जैसे ही यूपी कोरोना कर्फ्यू से मुक्त हुआ उत्तराखंड के मुखिया का दिल भी पिघल गया। जिनके सिपहसालार ताल ठोक कर कह रहे थे कि “जान माल की रक्षा के लिये सरकार किसी के दबाव में आकर दुकानें बाजार नही खोलेगी” आखिर एकाएक अब शराब के साथ आवश्यक वस्तुओं की दुकानो को भी पूर्णतः न सही पर सुबह 8 से शाम 5 बजे तक खोलने को मान जाते है।

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आज से पूर्व जब हरीश रावत सरकार द्वारा प्रदेश में विदेशी मदिरा के एफएलटू खोलने के साथ ही फेक्ट्री लगाने का फैसला लिया गया था, तो प्रदेश में आदर्शराज की पक्षधर भाजपा ने विरोध के सुर ताल अलापने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन आज सत्तानवीस भाजपा स्वयं रोटी से पहले मदिरा की पक्षधर हो गई और शायद यही वजह है कि आवश्यक वस्तुओं की दुकानों को दो दिन और मदिरा की दुकानों को तीन दिन खोलने का निर्देश दे देती है। बहरहाल वजह चाहे जो भी रही पर रोटी और शराब अब समान दिनो में वितरित हो सकेगी।

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TAGS: editorial kitne chehro se utar gaye aaj muflisi ke nakab

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