खबर सच है संवाददाता
हल्द्वानी। अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी होने के आरोपी भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम के राज्यपाल पद से बर्खास्त करने और अंकिता भंडारी को न्याय की मांग को लेकर विभिन्न जनसंगठनों ने प्रदर्शन कर चार सूत्रीय ज्ञापन सिटीमजिस्ट्रेट हल्द्वानी के माध्यम से भारत की राष्ट्रपति महोदया को ज्ञापन भेजा।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि, यह अत्यंत दुखद और खेदजनक है कि उत्तरखंड में घटित अंकिता भंडारी हत्याकांड में जिन भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम पर वीआईपी होनेका आरोप लगा, उन्हें बिना किसी जांच के सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त कर दिया गया।
गौरतलब है कि 18 सितंबर 2022 को पौड़ी जिले के गंगा भोगपुर स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गयी और शव ऋषिकेश के नजदीक चीला बैराज में फेंक दिया गया। इस मामले में भाजपा के दर्जा राज्य मंत्री रह चुके विनोद आर्य के पुत्र पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर औरअंकित गुप्ता को अदालत से आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है। इन तीनों को सजा देते हुए 30 मई 2025 अपर सत्र न्यायाधीश, कोटद्वार की अदालत ने अपने फैसले में लिखा कि “वीआईपी” को “स्पेशल सर्विस” देने से इंकार करने के चलते अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गयी। यह अफ़सोस की बात है कि इतने गंभीर मामले में वे यौन अपराधी कभी पकड़े ही नहीं गए जिनकी यौन लिप्सा की पूर्ति करने से इंकार करने पर स्वाभिमानी लड़की अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गयी।
भाकपा माले के नैनीताल जिला सचिव डॉ कैलाश पाण्डेय ने कहा कि, आरोप बेहद संगीन हैं, इनकी तत्काल जांच की जानी चाहिए थी। लेकिन अंकिता भंडारी के माता-पिता और उत्तराखंड के व्यापक जनमानस की मांग पर जो सीबीआई जांच करवाने का निर्णय हुआ, उस जांच के दायरे में दुष्यंत कुमार गौतम और अजेय कुमार को कभी नहीं लाया गया और अब तो दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बना करके, किसी भी तरह की जांच से बचाव का संवैधानिक कवच प्रदान कर दिया गया है। अजेय कुमार को भी राजस्थान भाजपा का संगठन मंत्री बना कर उत्तराखंड और जांच दोनों से दूर कर दिया गया है। कुल मिलाकर भाजपा अंकिता मामले में न्याय होने देना नहीं चाहती।
रचनात्मक कांग्रेस के संयोजक भुवन पाठक ने कहा कि, अंकिता भंडारी हत्याकांड न केवल एक लड़की को जिस्मफरोशी में धकेलने और उसके इंकार पर उसकी जघन्य हत्या का मामला है बल्कि यह लड़कियों- महिलाओं के रोजगार के लिए बाहर निकलने पर उन्हें शिकार बनाने वालों के रसूख के दम पर बच निकलने का गंभीर दृष्टांत पेश करता है, जो किसी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
प्रदर्शन कर ज्ञापन देने वालों में आइसा, भाकपा माले, रचनात्मक कांग्रेस, पछास, प्रमएके, भीम आर्मी से जुड़े आकाश भारती,संदीप टम्टा, डॉ कैलाश पाण्डेय, भुवन पाठक, रजनी जोशी, नफीस अहमद खान, महेश, आफताब आलम, महेश आर्य, नितिन, अमित कुमार, गौरव आदि शामिल रहे।