खबर सच है संवाददाता
नैनीताल। चलती बस में छात्रा के साथ छेड़छाड़ और अश्लील हरकत के करीब चार साल पुराने मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नैनीताल रवि शंकर मिश्रा की अदालत ने आरोपी शुभम सक्सेना को दोषी मानते हुए तीन साल के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, घटना का वीडियो बनाने और उसे प्रसारित करने के आरोपी बनाए गए दो युवकों को पर्याप्त सबूत नहीं मिलने पर बरी कर दिया गया।
मामला चार जून 2022 का है। अभियोजन के मुताबिक, बिंदुखत्ता क्षेत्र की छात्रा हल्द्वानी स्थित एक संस्थान से पढ़ाई करने के बाद सेंच्यूरी बस से घर लौट रही थी। मोटाहल्दू से गुमटी हल्दूचौड़ के बीच बस में आरोपी शुभम ने छात्रा के साथ जबरन छेड़छाड़ और बदसलूकी की। आरोप है कि इसी दौरान उसने छात्रा के चेहरे पर काट लिया, जिससे उसे चोट भी आई।
घटना के बाद छात्रा ने बस में मौजूद बच्चों के मोबाइल में घटना से जुड़ा वीडियो देखा।इसके बाद उसने लालकुआं कोतवाली पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू की और जांच पूरी होने के बाद तीन आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता समेत नौ गवाह अदालत के सामने पेश किए।इसके अलावा मेडिकल रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी रिकॉर्ड पर रखे गए। बचाव पक्ष ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि आरोपियों को झूठा फंसाया गया है। वीडियो से जुड़े मामले में अभिषेक कुमार उर्फ अर्जुन और शहजाद अंसारी पर आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत आरोप लगाए गए थे। अदालत ने साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद पाया कि दोनों के खिलाफ वीडियो बनाने या प्रसारित करने का आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। सीएफएसएल चंडीगढ़ की जांच रिपोर्ट में भी यह साबित नहीं हुआ कि दोनों आरोपियों ने आपत्तिजनक वीडियो प्रसारित किया था।
अदालत ने शुभम को धारा 354 के तहत तीन साल की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माना, धारा 354ए के तहत दो साल की कैद और दो हजार रुपये जुर्माना, धारा 354डी के तहत दो साल की कैद और दो हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 323 के तहत एक साल की कैद और एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
कोर्ट ने सभी सजाओं को एक साथ चलाने के निर्देश दिए हैं। इस कारण शुभम को प्रभावी रूप से तीन साल की सजा भुगतनी होगी। वहीं, वीडियो प्रसारित करने के आरोप में आरोपी बनाए गए अभिषेक और शहजाद को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया।




