“संस्कृत दिवस पर गूंजा देववाणी का गौरव, सनातन संस्कृति के संरक्षण का लिया संकल्प”

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‘खबर सच है’ के लिए संवाददाता संदीप बिष्ट 
 
हल्द्वानी। संस्कृत सप्ताह के द्वितीय दिवस के अवसर पर श्री सनातन धर्म संस्कृत महाविद्यालय में संस्कृत दिवस समारोह का भव्य आयोजन किया गया।कार्यक्रम की शुरुआत सनातन संस्कृति की परंपराओं और संस्कृत श्लोकों के साथ मुख्य एवं विशिष्ट अतिथियों के स्वागत से हुई।
 
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि राज्य मंत्री शंकर कोरंगा एवं विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार एवं ‘खबर सच है’ के संपादक मनोज कुमार पाण्डे ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
 
समारोह में महाविद्यालय के छात्रों ने संस्कृत भाषा में गीत, श्लोक एवं नाटक प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथियों और दर्शकों का मन मोह लिया। वहीं, हिमालय संगीत शोध समिति के कलाकारों ने भी सुर-संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भर दिया।
 
इस अवसर पर मुख्य अतिथि राज्य मंत्री शंकर कोरंगा ने अपने संबोधन में सनातनी संस्कृति के प्रचार-प्रसार और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी सांस्कृतिक सभ्यता और परंपराओं के अनुरूप कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ना चाहिए।
 
विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार एवं ‘खबर सच है’ के संपादक मनोज कुमार पाण्डे ने कहा कि संस्कृत दिवस विश्व की प्राचीनतम और समृद्ध भाषाओं में से एक संस्कृत के गौरव से परिचित कराने का अवसर है। उन्होंने कहा, “संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, संस्कृति और परंपराओं की अमूल्य धरोहर है। वेदों, उपनिषदों और शास्त्रों से लेकर आधुनिक शोध तक संस्कृत का योगदान अद्वितीय रहा है। इसलिए संस्कृत दिवस पर हमें देववाणी संस्कृत के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार का संकल्प लेना चाहिए।”
 
महाविद्यालय के प्राचार्य मनोज पाण्डे ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्कृत केवल अतीत की भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, संस्कृति और भविष्य की संभावनाओं से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है।
 
कार्यक्रम में विद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. गोपाल दत्त त्रिपाठी, वरिष्ठ अधिवक्ता जगदीश चन्द्र बेलवाल, विद्यालय समिति के अध्यक्ष अधिवक्ता योगेश तिवारी एवं अशोक वार्ष्णेय ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
 
कार्यक्रम का संचालन विद्यालय के प्राचार्य साकेत पाठक ने किया। समारोह में संस्कृत भाषा, भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश प्रमुखता से दिया गया।

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