खटीमा। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत प्रधानमंत्री आदर्श थारू राजकीय इंटर कॉलेज में एनसीसी आर्मी और एयरफोर्स विंग के कैडेटों के लिए टीबी-एचआईवी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य कैडेटों को टीबी और एचआईवी संक्रमण से जुड़ी सही और वैज्ञानिक जानकारी देना तथा उन्हें समाज में जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजीव गोस्वामी और जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. संजय पांडेय के निर्देशन में हुआ।
कार्यक्रम के दौरान राजकीय अस्पताल स्थित आईसीटीसी की परामर्शदाता धर्मेश गुप्ता ने एचआईवी संक्रमण के प्रमुख कारणों, संक्रमण फैलने के तरीकों, बचाव के उपायों, जांच प्रक्रिया और उपचार संबंधी जानकारी दी। बताया कि एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। सही समय पर जांच और नियमित उपचार से संक्रमित व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है। उन्होंने कैडेटों से एचआईवी को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने और लोगों तक प्रमाणिक व वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने की अपील की।
जिला पीएमडीटी टीबी-एचआईवी समन्वयक नवल किशोर पंडित ने कहा कि एनसीसी कैडेट अनुशासन, नेतृत्व और सामाजिक जिम्मेदारी के लिए जाने जाते हैं। उन्हें जागरूक करने का उद्देश्य यह है कि वे अपने परिवार, विद्यालय और आसपास के क्षेत्रों में टीबी और एचआईवी के प्रति लोगों को जागरूक कर सकें। उन्होंने कहा कि जागरूकता के अभाव में कई लोग बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं और समय पर जांच व उपचार नहीं कराते। ऐसे में कैडेट महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक संजीव जोशी ने टीबी के प्रमुख लक्षणों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खांसी रहना, लगातार बुखार आना, रात में पसीना आना, वजन कम होना, भूख न लगना और कमजोरी महसूस होना टीबी के संभावित लक्षण हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लक्षण दिखाई देने पर व्यक्ति को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करानी चाहिए। टीबी की पुष्टि होने पर उपचार की पूरी अवधि तक नियमित रूप से दवा लेना बेहद जरूरी है। बीच में दवा छोड़ने से बीमारी दोबारा बढ़ सकती है और दवा प्रतिरोधी टीबी का खतरा भी पैदा हो सकता है।
उन्होंने कैडेटों को संक्रमण से बचाव के उपाय भी बताए। खांसते और छींकते समय मुंह ढकना, कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन रखना, भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सावधानी बरतना और संक्रमित व्यक्ति को समय पर उपचार दिलाना इसके प्रमुख उपाय हैं। उन्होंने कैडेटों से अपील की कि वे अपने क्षेत्र में टीबी के लक्षण वाले लोगों को जांच और उपचार के लिए प्रेरित करें तथा बीमारी को लेकर किसी भी प्रकार का भेदभाव न होने दें।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने एचआईवी संक्रमण से बचाव के लिए सुरक्षित व्यवहार अपनाने, संक्रमित रक्त या असुरक्षित उपकरणों से बचने और आवश्यकता पड़ने पर अधिकृत केंद्रों पर जांच कराने की सलाह दी। कैडेटों ने भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया।
कार्यक्रम में कॉलेज के प्रधानाचार्य संतोष कुमार, समिति के मनीष राणा व सदस्य, राजकीय अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मी, शिक्षक और एनसीसी कैडेट उपस्थित रहे। अधिकारियों ने कहा कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी से टीबी और एचआईवी के खिलाफ चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों को और प्रभावी बनाया जा सकता है।
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