जहां संकल्प है, वहां कुछ भी असंभव नहीं – श्री हरि चैतन्य महाप्रभु 

ख़बर शेयर करें -
 
 
खबर सच है संवाददाता 
 
रामनगर। प्रेमावतार, युगदृष्टा, श्री हरि कृपा पीठाधीश्वर व विश्व विख्यात संत स्वामी श्री हरि चैतन्य पुरी जी महाराज ने आज यहां श्री हरि कृपा आश्रम में उपस्थित विशाल भक्त समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि संकल्प की शक्ति अपरिमित है। संकल्प कालजयी है संकल्प की गति अबाध हैं जहां संकल्प है, वहां कुछ भी असंभव नहीं है पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण की अभेद शक्ति भी मनुष्य के संकल्प को रोक नहीं सकी और व्यक्ति चन्द्रमा तक पहुंच गया। सागर की अथाह गहराई हो या एवरेस्ट का उच्चतम शिखर, संकल्प के आगे छोटा पड़ गया। संकल्प मनुष्य की आन्तरिक शक्तियों का सामूहिक निश्चय है एक बार अगर ये शक्ति जग जाए तो सृष्टि की पूरी ताकत भी इसे परास्त नही कर सकती।
 
उन्होंने कहा कि धार्मिक कथाएं, पौराणिक गाथाऐं, ऐतिहासिक घटनाएं सभी एक स्वर में संकल्प शक्ति रूपी इस महाशक्ति की क्षमता को प्रभावित करते हैं। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान का प्रारंभ संकल्प मंत्र से ही होता है, अर्थात मनोवांछित इच्छा प्राप्त करने के लिए शुभ कार्य का आरंभ एक शुभ संकल्प से ही होता है। संकल्प शक्ति का यदि संधि विच्छेद किया जाए तो स्वयं+कल्प होता है कल्प यानि कितने युग बितने के बाद कल्प आता है यह बता रहा है कि मनुष्य किसी कार्य को असंभव इसलिए कहता है क्योंकि उसे लगता है कि यह कार्य उसके जीवन में पूरा नहीं हो सकेगा। गहराई से विचार करें तो समय की सीमा उसकी सामर्थ्य और शक्ति को तोड़ देती है लेकिन परिभाषा के अनुसार देखें व चेतना में भरें तो यह हमारी सोई हुई शक्तियों को जगाकर किसी कार्य को भी असंभव न मानते हुये पूरा करने की प्रेरणा देगा। आवश्यक नहीं है कि कर्म करने वाले को फल उसे इस जीवन में ही मिल जाए, हो सकता है कि उस संकल्प को पूर्ण होने में अर्थात लक्ष्य प्राप्ति में कई पीढ़ियां भी गुजर सकती हैं।
 
उन्होंने कहा कि हमारे शास्त्रों ने हमें मात्र संकल्प नहीं ‘तनमे मनः शिव संकल्पमस्तु’ के आधार पर शिव अर्थात कल्याणकारी, सुंदर व सत्य संकल्प करने की प्रेरणा दी।
 
उन्होंने कहा कि बिना विचारे कोई क़र्म न करें ,तथा न ही कुछ बोलें, ना किसी से संबंध बनाए व न ही किसी से कोई व्यवहार करें। विचारशील प्राणी कुछ भी बोलने से, व्यवहार करने, संबंध बनाने या कर्म करने से पहले विचार करता है। जिससे उसे गिलानी पश्चाताप व उपहास का सामना नहीं करना पड़ता। संत, गुरू व परमात्मा का दर दाता का दर है ना कि भिखारी का। आज के तथाकथित संत, गुरू, ब्राह्मण व शिक्षिकों ने अपने सम्मान व गरिमा को स्वयं खोया है। संत व गुरू हमारी संपत्ति नहीं अपितु संतति चाहते हैं। संपत्ति चाहने वाला लालची, लोभी व्यक्ति गुरू या संत कदापि नहीं हो सकता। सच्चा भाव ही सच्ची उपासना है। सच्चे हृदय से प्रेम व श्रद्धापूर्वक की गई प्रार्थना को परमात्मा अवश्य सुनते हैं चाहे व्यक्ति को वेद, शास्त्र, पुराणों का ज्ञान हो या न हो भाषाशैली भी विशेष हो या न हों चाहे हम शिक्षित हों या अशिक्षित हों, शुद्ध हार्दिक भावनाओं से किसी प्रकार भी प्रार्थना की जाए परमात्मा उसे नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते।
 
उन्होंने कहा कि आज हमारी, हमारे परिवार, देश, समाज की जो दुर्दशा हो रही है। विभिन्न प्रयास करने के बावजूद जिससे हम उबर नहीं पा रहे हैं प्रयास करने के साथ-साथ प्रभु से उनकी कृपा याचना से परिपूर्ण भाव सहित प्रार्थनाएँ अवश्य करनी चाहिए। परमात्मा हमारी वस्तुओं, पदार्थों, मान सम्मान इत्यादि का नहीं वह तो हमारी प्रेम व भावनाओं का भूखा है। प्रेम रहित दुर्योधन के अतिथ्य को त्याग कर विदुर की कुटिया में रुख़ा साग व केले के छिलके भी प्रेम सहित स्वीकार करता है। भिलनी के खट्टे मीठे झूठे बेर में उसे जो स्वाद आता है ऐसा तो अयोध्या व जनकपुर के विभिन्न व्यंजनों में भी नहीं आता।
 
महाराज श्री ने कहा कि मात्र मानव शरीर पाकर ही हम सच्चे अर्थों में मानव या इंसान कहलाने का अधिकारी नहीं बन जाते हैं, स्वयं को सुसंस्कारित करके समाज के लिए उपयोगी बनाएँ। सदाचार पूर्ण जीवन बिताएँ राष्ट्रीयता, नैतिकता व चरित्र को भी जीवन में महत्व दें।
 
महाराज श्री के दिव्य प्रवचनों को सुनने के लिए स्थानीय, क्षेत्रीय व दूरदराज़ से रोज़ श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। आश्रम पर महाराज श्री के दर्शनों व दिव्य प्रवचनों को सुनने के लिये निरंतर भक्तों का ताँता लगा हुआ है। कार सेवा में भी भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा है। अपने धारा प्रवाह प्रवचनों से उन्होंने सभी को मंत्रमुग्ध व भाव विभोर कर दिया । सारा वातावरण भक्तिमय हो गया व श्री गुरु महाराज, कामां के कन्हैया व लाठी वाले भैय्या की जय जयकार से गूंज उठा।
 
श्री हरि कृपा आश्रम चित्रकूट रामनगर नैनीताल उत्तराखंड में श्री महाराज जी के पावन सानिध्य में नवरात्रि महोत्सव के उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष की भांति विशाल यज्ञ अनुष्ठान, माँ दुर्गा का पूजन व दिव्य श्री रामकथा का आयोजन 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक होगा। नित्य प्रातः 7 बजे से दुर्गा पूजन, यज्ञ, अनुष्ठान व रामचरित मानस पाठ का आयोजन होगा। नित्य सांय 3 बजे से 6 बजे तक महाराज श्री के दिव्य प्रवचन होंगे। जिसमें सभी धर्म प्रेमी जनता को सप्रेम आमंत्रित किया गया है।
ADVERTISEMENTS
यह भी पढ़ें 👉  अराजक तत्वों पर प्रभावी कार्रवाई :  जिलाधिकारी के निर्देशन में गुंडा एक्ट पर चार व्यक्ति जिला बदर
Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad

लेटेस्ट न्यूज़ अपडेट पाने के लिए -

👉 हमारे समाचार ग्रुप (WhatsApp) से जुड़ें

👉 हमसे फेसबुक पर जुड़ने के लिए पेज़ को लाइक करें

👉 ख़बर सच है से टेलीग्राम (Telegram) पर जुड़ें

👉 हमारे पोर्टल में विज्ञापन एवं समाचार के लिए कृपया हमें [email protected] पर ईमेल करें या +91 97195 66787 पर संपर्क करें।

TAGS: Devbhoomi News Hindi News Khabar Sach Hai riport . News from the hills News From the Pahad nothing is impossible – Shri Hari Chaitanya Mahaprabhu ramnagar news Swami Shri Hari Chaitanya Puri Ji Maharaj Uttrakhand news Where there is determination world-renowned saint and head of Shri Hari Kripa Peeth उत्तराखण्ड न्यूज धार्मिक न्यूज रामनगर न्यूज श्री हरि कृपा पीठाधीश्वर व विश्व विख्यात संत स्वामी श्री हरि चैतन्य पुरी जी महाराज

More Stories

शिक्षा-आध्यात्म

मुस्कान मानव मुख पर सौभाग्य का प्रतीक – श्री हरि चैतन्य महाप्रभु

ख़बर शेयर करें -

ख़बर शेयर करें –    खबर सच है संवाददाता    रामनगर पधारने पर श्री हरि चैतन्य महाप्रभु का हुआ भव्य स्वागत    रामनगर। प्रेमावतार, युगदृष्टा, श्री हरि कृपा पीठाधीश्वर व विश्व विख्यात संत स्वामी श्री हरि चैतन्य पुरी जी महाराज ने आज यहां श्री हरि कृपा आश्रम में उपस्थित विशाल भक्त समुदाय को संबोधित करते […]

Read More
शिक्षा-आध्यात्म

ईश्वर कृपा से जो भी मिला है उसका सदुपयोग करें – श्री हरि चैतन्य महाप्रभु

ख़बर शेयर करें -

ख़बर शेयर करें –    खबर सच है संवाददाता    गढीनेगी। प्रेमावतार, युगदृष्टा, श्री हरिकृपा पीठाधीश्वर व विश्व विख्यात संत स्वामी श्री हरि चैतन्य पुरी जी महाराज ने यहाँ श्री हरिकृपा धाम आश्रम में भक्तो को संबोधित करते हुए कहा कि हम सभी अपने महापुरुषों, तीर्थों, शास्त्रों व परमात्मा के विभिन्न अवतारों से प्राप्त होने […]

Read More
शिक्षा-आध्यात्म

बदले की भावना से वैर, क्षमा से प्रेम बढ़ता है – श्री हरि चैतन्य महाप्रभु   

ख़बर शेयर करें -

ख़बर शेयर करें –    खबर सच है संवाददाता    हल्द्वानी। प्रेमावतार, युगदृष्टा,  श्री हरि कृपा पीठाधीश्वर व विश्व विख्यात संत स्वामी श्री हरि चैतन्य पुरी जी महाराज ने आज यहां पीलीकोठी में उपस्थित विशाल भक्त समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि दुख, अशांति, कलेह-क्लेश, उलझन शोक भय, आदि से लाख प्रयास करके भी […]

Read More