खबर सच है संवाददाता
देहरादून/नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय में पुल निर्माण के दौरान रेत की जगह मिट्टी का उपयोग करने के मामले में सुनवाई हुई। अभियंता अजय कुमार, जिन्हें इस मामले में डेपुटेशन पर भेजा गया था, को सस्पेंड किया गया था।
मामला देहरादून जिले के सौड़ क्षेत्र का है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान फिलहाल अभियंता को कोई राहत नहीं दी है। कोर्ट ने विपक्षी पक्ष को तीन हफ्ते के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद होगी।
सुनवाई के दौरान बताया गया कि पुल निर्माण में रेत की जगह मिट्टी मिलाई जा रही थी।ग्रामीणों ने इसे देखकर विरोध किया और इसका वीडियो भी बनाया।शिकायत मिलने पर पुल निर्माण कंपनी ब्रिडकुल ने अभियंता अजय कुमार को सस्पेंड कर दिया।कोर्ट में यह भी कहा गया कि अभियंता के इस कदम से आम जनता की सुरक्षा और पैसों का दुरुपयोग हो सकता था। पुल बन जाने के बाद इससे हादसे का खतरा भी था।
अभियंता ने बर्खास्तगी के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। उनका दावा है कि उनकी नियुक्ति लोक निर्माण विभाग ने की थी और सस्पेंड करने का अधिकार कंपनी को नहीं था। उनका कहना था कि निलंबन केंद्रीय प्रशासनिक नियमावली के खिलाफ है। हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए फिलहाल अभियंता को कोई राहत नहीं दी और आम जनता के हितों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताया।




