देहरादून। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर व वरिष्ठ नेता मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूड़ी का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। वह पिछले कुछ समय से गंभीर रूप से अस्वस्थ चल रहे थे और देहरादून के मैक्स अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था। उनके निधन की सूचना मिलते ही पूरे देश और प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे उत्तराखंड और राष्ट्रीय राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।
साल 1999 में जब केंद्र में अटल जी की सरकार बनी, तो खंडूड़ी को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की कमान सौंपी गई और उनके इसी कार्यकाल में सड़कों और हाईवे की तस्वीर बदलनी शुरू हुई। आज देश के सुदूर गांवों को जोड़ने वाली ‘प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना’ (PMGSY) को जमीन पर उतारने और उसकी मजबूत नींव रखने का श्रेय जनरल खंडूड़ी के प्रशासनिक कौशल और दूरदृष्टि को ही जाता है।
उत्तराखंड राज्य बनने के बाद जब भाजपा के भीतर गुटबाजी चरम पर थी, तब दिल्ली हाईकमान को एक ऐसे चेहरे की तलाश थी जो सरकार और संगठन दोनों को अनुशासन का पाठ पढ़ा सके। पार्टी ने एक बार फिर खंडूड़ी पर भरोसा जताया और वह साल 2007 से 2009 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे। उनके कार्यकाल को ‘जीरो टॉलरेंस’ और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त फैसलों के लिए जाना जाता है। इसके बाद जब 2011 में सरकार पर दोबारा भ्रष्टाचार के आरोप लगे और पार्टी की साख दांव पर थी, तो चुनाव से ऐन पहले भाजपा ने फिर से अपने इस सबसे ईमानदार चेहरे को आगे किया और वह दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने। भुवन चंद्र खंडूड़ी की बेटी रितु खंडूरी वर्तमान में उत्तराखंड विधानसभा की पहली महिला स्पीकर हैं, जबकि उनके बेटे मनीष खंडूड़ी भी राजनीति में सक्रिय हैं। जनरल साहब उस दौर की राजनीति के प्रतीक थे जहां नेता की सबसे बड़ी पूंजी उसकी व्यक्तिगत विश्वसनीयता और ईमानदारी होती थी। आज की आक्रामक राजनीति के दौर में भी खंडूड़ी अपनी कड़क छवि और बेदाग चरित्र के कारण हमेशा अलग नजर आए। देवभूमि उत्तराखंड उन्हें सिर्फ एक पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि सिद्धांतों और अनुशासन के एक अद्वितीय प्रतीक के रूप में हमेशा याद रखेगी।




