देहरादून। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा अब समापन की ओर बढ़ रही है। विजयदशमी के अवसर पर विभिन्न धामों के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने की तिथियां और शुभ मुहूर्त निर्धारित कर दिए गए हैं। इस वर्ष गंगोत्री धाम के कपाट 10 नवंबर को, जबकि केदारनाथ और यमुनोत्री धाम के कपाट 11 नवंबर को बंद होंगे। वहीं, बदरीनाथ धाम के कपाट 16 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। इसके अलावा तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट 6 नवंबर और द्वितीय केदार मद्महेश्वर के कपाट 16 नवंबर को बंद होंगे।
10 नवंबर को बंद होंगे गंगोत्री धाम के कपाट
विश्व प्रसिद्ध गंगोत्री धाम के कपाट 10 नवंबर को अन्नकूट पर्व पर दोपहर 12 बजकर 5 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। कपाट बंद होने के बाद मां गंगा की उत्सव डोली पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा के लिए रवाना होगी। डोली चंडी मंदिर में रात्रि विश्राम करेगी और 11 नवंबर को भैया दूज के अवसर पर मुखबा पहुंचेगी। इसके बाद शीतकाल में श्रद्धालु मुखबा स्थित मां गंगा के मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे।
11 नवंबर को केदारनाथ और यमुनोत्री के कपाट होंगे बंद
भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में शामिल केदारनाथ धाम के कपाट 11 नवंबर को भैया दूज के पावन पर्व पर सुबह 8 बजकर 30 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। इसके बाद बाबा केदार की चल विग्रह उत्सव डोली पारंपरिक मार्ग से होते हुए शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ पहुंचेगी। शीतकाल के दौरान बाबा केदार की पूजा-अर्चना ऊखीमठ में संपन्न होगी। वहीं, यमुनोत्री धाम के कपाट भी 11 नवंबर को भैया दूज के अवसर पर सुबह 10 बजकर 28 मिनट पर बंद होंगे। विजयदशमी के अवसर पर मंदिर समिति और पुरोहित समाज की बैठक में पंचांग के अनुसार कपाट बंद करने का शुभ मुहूर्त निर्धारित किया गया। कपाट बंद होने के बाद मां यमुना की उत्सव डोली उनके शीतकालीन प्रवास स्थल खरसाली के लिए रवाना होगी। सर्दियों में श्रद्धालु खरसाली स्थित मां यमुना के मंदिर में दर्शन कर सकेंगे।
16 नवंबर को बंद होंगे बदरीनाथ धाम के कपाट
चमोली जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम के कपाट 16 नवंबर को रात 9 बजकर 37 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इसके अगले दिन यानी 17 नवंबर को भगवान बदरीविशाल की देवडोली परंपरा के अनुसार शीतकालीन प्रवास स्थल के लिए प्रस्थान करेगी। कपाट बंद होने के साथ ही बदरीनाथ धाम में इस वर्ष की यात्रा का समापन हो जाएगा।
6 नवंबर को बंद होंगे तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट
पंचकेदारों में शामिल तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट 6 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। इसके बाद भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ पहुंचेगी। यहां शीतकाल के दौरान श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर सकेंगे।
16 नवंबर को बंद होंगे द्वितीय केदार मद्महेश्वर के कपाट
रुद्रप्रयाग जिले में स्थित द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर धाम के कपाट 16 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। कपाट बंद होने के बाद भगवान की चल विग्रह डोली शीतकालीन प्रवास के लिए रवाना होगी। पहले दिन डोली का रात्रि विश्राम गौंडार गांव में होगा। 17 नवंबर को डोली गौंडार से रांसी, 18 नवंबर को रांसी से गिरिया और 19 नवंबर को गिरिया से चलकर ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर पहुंचेगी। यहां भगवान मद्महेश्वर की शीतकालीन पूजा-अर्चना संपन्न होगी।
शीतकाल में भी जारी रहेंगी धार्मिक परंपराए
हर वर्ष सर्दियों में बर्फबारी और प्रतिकूल मौसम की आशंका को देखते हुए चारधाम के कपाट बंद किए जाते हैं। इसके बाद भगवान की उत्सव डोलियां और देव विग्रह निर्धारित शीतकालीन प्रवास स्थलों पर पहुंचते हैं। इन स्थलों पर परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना जारी रहती है। इससे श्रद्धालु शीतकाल के दौरान भी भगवान के दर्शन कर सकेंगे।




