जसपुर। विश्व विख्यात संत श्री हरि कृपा पीठाधीश्वर स्वामी श्री हरि चैतन्य पुरी जी महाराज ने आज दशमेश गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह के प्रकाशोत्सव पर विशाल जन समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि सर्वस्वदानी हिन्द की चादर श्री गुरु गोबिंद सिंह साहिब का ऋण हम मानव समाज कभी चुका नहीं सकते। उनका त्याग, बलिदान, समर्पण व धर्म की संस्थापना में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। गुरु का साक्षात स्वरूप श्री गुरु ग्रंथ साहिब के रूप में जो महान मार्गदर्शक हमें मिला है जिसका अनुसरण करके हम अपने जीवन को सार्थक कर सकते हैं उसके लिए समाज सदैव ऋणी रहेगा। श्री महाराज जी ने उनके व उनके परिवार के जीवन पर प्रकाश डाला। उन महान बच्चों के बलिदान की चर्चा करते हुए श्री महाराज जी की आँखों में आँसू देखे गए व सभी भाव विभोर हो गए। श्री महाराज जी ने शब्द गायन करके भी सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्री महाराज जी ने गुरुद्वारे में माथा भी टेका जहां उनका सभी ने सत्कार किया।
उन्होंने कहा कि संसार में कोई भी व्यक्ति रूप, धन, कुल या जन्म से नहीं अपितु अपने कर्मों से महान बनता है। यदि कुल से महान होते तो रावण जैसा महान कौन होता? रूप से ही महान होते तो अष्टावक्र, भगवान गणेश जी, सुकरात जैसे व्यक्ति कभी महान न बन पाते। कई बार हो सकता है कि वर्तमान मे किसी को देखकर लगे कि इसने तो कोई महान कर्म नहीं किये तो अवश्य पूर्व में किये होंगे अत: हमें महानता के कार्य करने चाहिए तथा स्वयं को कभी महान नहीं समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में विनम्रता, सरलता, सादगी व संयम को अपनाना चाहिए। कुछ ऐसा कार्य करना चाहिए कि संसार में लोग हमें याद ही नहीं बल्कि अच्छाई से सदैव याद रखें। बहुत से लोग मर कर भी जिंदा रहते हैं तथा बहुत सेi जीवित भी मृतक तुल्य जीवन जीते है। किसी का तिरस्कार न करें। जो भी देखे,सुनें या पढे उस पर विचार करें किसी को भी नुकीले व्यंग्य बाण न चुभाए। अर्थात ऐसा कुछ ना बोलें जिससे किसी के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचे, किसी का दिल दुखे या प्रेम,एकता, सद्भाव नष्ट हो जाए, अशांति हो जाए, कलह क्लेश या वैमनस्य पैदा हो जाए। हमारे ह्रदय उदार व विशाल होने चाहिए।
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