श्री दिव्येश्वर महादेव मंदिर में दस दिवसीय नवरात्रि महोत्सव एवं विराट धर्म सम्मेलन का भव्य शुभारंभ 

ख़बर शेयर करें -
 
 
खबर सच है संवाददाता 
 
शक्ति को संजोकर रखने में ही शक्ति की आराधना की पूर्णता है – श्री हरि चैतन्य महाप्रभु 
 
 
 
रामनगर। श्री हरि कृपा आश्रम चित्रकूट में स्थापित श्री दिव्येश्वर महादेव मंदिर में नवरात्रि के उपलक्ष में आयोजित दस दिवसीय विशाल यज्ञ अनुष्ठान में भक्तों का अपार जनसैलाब उमड़ रहा है। पूजा, अनुष्ठान, अभिषेक इत्यादि के अलावा अपने दिव्य ओजस्वी प्रवचनों में श्री हरि कृपा पीठाधीश्वर प्रेमावतार, युगदृष्टा, विश्व विख्यात संत स्वामी श्री हरि चैतन्य पुरी जी महाराज ने विशाल भक्त समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि असंतुलित, असंयमित, अनियमित दिनचर्या के कारण, गलत खान-पान के कारण, चरित्र हीनता के कारण या दुरूउपयोग के कारण हम सभी आज अपनी शक्ति को खोते चले जा रहे हैं।
 
अपने दिव्य व ओजस्वी प्रवचनों में उन्होंने कहा कि शक्ति विहीन जीवन तो निरर्थक है। अतिशयोक्ति न होगी कि शक्ति विहीन तो शिव भी शव तुल्य है।शक्ति की अनादि काल से आराधना चल रही है।विभिन्न रूपों में सभी मतों, संप्रदायों में शक्ति की अराधना के महत्व को स्वीकार किया है। लेकिन शक्ति की सच्ची उपासना शक्ति को संजोकर रखने में है। नौ दिन के प्रतीक रूप में जो अपने शरीर के नौ द्वारों पर संयम व नियंत्रण रखता है उसे अवश्य ही विजय प्राप्त होती है। 
 
उन्होंने कहा कि हम सभी के अंदर सदैव से अच्छाई व बुराई, धर्म-अधर्म, उचित-अनुचित इत्यादि द्वंद चल रहा है। लेकिन यह हमारे विवेक पर निर्भर करता है कि हम किसे जताते हैं। मन की चंचलता को अभ्यास द्वारा रोककर एकाग्रचित्त होकर, बर्हिमुखता त्यागकर, अंर्तमुख होकर हम अपनी स्वयं की प्रभा को जागृत कर सकते हैं। अध्यात्म पथ पर अग्रसर हो सकते हैं। प्रभु भक्ति का यदि हृदय में निवास हो तो किंचित मात्र भी प्रत्यक्ष में तो क्या स्वप्न में भी हमें दुख व्यथित नहीं कर सकते। किसी सुखी को देखकर ईषर्या करना व दुखी को देखकर प्रसन्न होना यह दुष्टता के लक्षण है। आज हर ओर आसुरी प्रवृत्तियों का बोलबाला है। धर्म के अनुष्ठान चाहे बहुत हो रहे हैं। परंतु धर्म के आचरण में इतनी वृद्धि नहीं हो रही है। मदिरापान, मांसाहार, दूसरों के अनिष्ट चिंतन व दिल दुखाना, जीवो की हत्या करना, वेद शास्त्रों के प्रतिकूल चलना, तीर्थ, मंदिर, मस्जिद, चर्च इत्यादि की मर्यादाओं को समाप्त करने का प्रयास, माता-पिता व बुजुर्ग संत महापुरुषों का अनादर व तिरस्कार करना, देश व समाज को तोड़ने की घृणित साज़िशे करना अथवा किसी प्रकार से भी उनमें सहयोग देना इत्यादि ये सभी आसुरी प्रवृत्तियां है। हम सभी स्वयं को इनसे दूर रहें साथ ही औरों को बचने की प्रेरणा दें। 
 
अपने दिव्य प्रवचनों में उन्होंने कहा कि प्रेम, एकता व सद्भाव को बढ़ावा दें। धर्म जोड़ता है तोड़ता नहीं परंतु दुर्भाग्यवश आज धर्म के नाम पर लोग टूटते  व बटते जा रहे हैं। संत, महापुरुष व परमात्मा सबके हैं व सभी उनके हैं। इन्हें मात्र किसी वर्ग, संप्रदाय, जाति इत्यादि तक सीमित करना गलत होगा। विभिन्न मतभेदों को त्यागकर परिवार, देश व समाज में मिलजुल कर रहे। हम सभी अपने अन्तर मे आ चुके असुरत्व को त्यागे।  किंचित मात्र भी अपने अंदर ना आने दें। तथा देवत्व को अपनाएं। पावन भारत देश व इस देवभूमि की संस्कृति, पवित्रता व मर्यादा को नष्ट ना होने दें। देवता और राक्षसों का युद्ध सतयुग इत्यादि में ही नहीं सदैव से हर प्राणी मात्र के अन्तर में होता है, हो रहा है, व होता रहेगा। हमारे अंतर में चलने वाले देवत्व व असुरत्व के द्वंद में जीव किसे विजयी कराता है यह व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है। मात्र अपने अधिकारों के लिए ही जागरूक ना हो, अपने कर्तव्यों का भी पालन करें व सेवा करें। सद्गुरु के कहे अनुसार चलें। 
 
उन्होंने कहा कि धर्म के उत्थान व अधर्म के विनाश के लिए यथा सामर्थ्य, यथासंभव योगदान भी अवश्य दें। शबरी, निषाद इत्यादि जैसे समाज में ठुकराए व उपेक्षित वर्ग को भी गले लगाएं तभी राम के सच्चे भक्त कहलाने के अधिकारी हो पाएंगे। सभी में परमात्मा के दर्शन करते हुए व्यवहार करो। जो समस्त संसार को प्रभुमय कहते हैं या देखते हैं तो वे विरोध किससे करते हैं। वैर- विरोध, घृणा, द्वेष, अशांति इत्यादि त्यागो। कर्म, भक्ति व ज्ञान का जीवन  में समन्वय स्थापित करो। 
 
अपने धारा प्रवाह प्रवचनों में उन्होंने सभी भक्तों को मंत्रमुग्ध को भावविभोर कर दिया।सारा वातावरण भक्तिमय हो उठा तथा “श्री गुरु महाराज” “कामां के कन्हैया” व “लाठी वाले भैय्या” की जय जय कार से गुंजायमान हो उठा। महाराज जी के भक्ति गीतों को सुनकर सभी भक्त भावविभोर होकर नाचने लगे।
 
महाराज श्री के दिव्य प्रवचन को सुनने के लिए दूरदराज से भारी संख्या में भक्तजन पहुंचे। पांडाल में पहुंचने पर महाराज श्री का पुष्प वृष्टि कर स्वागत किया। “हरि बोल” की धुन में सभी झूम झूम के नाचने लगे। 
 
महाराज श्री के सानिध्य में विश्वकल्याणार्थ आयोजित यज्ञ व अनुष्ठान में आज प्रातः काल उपस्थित बड़ी संख्या में भक्तों के बीच पूर्व वैदिक व पौराणिक परंपराओं के अनुसार कलश स्थापना, जौ बोना, दिव्येश्वर महादेव का महाभिषेक एवं दुर्गा पूजा की गई, 19 अक्टूबर तक नित्य प्रातः काल नियमित रूप से चलेगा। सांय काल 3:00 बजे से प्रवचन व अंत में दुर्गा जी की भव्य आरती का आयोजन होगा।

लेटेस्ट न्यूज़ अपडेट पाने के लिए -

👉 हमारे समाचार ग्रुप (WhatsApp) से जुड़ें

👉 हमसे फेसबुक पर जुड़ने के लिए पेज़ को लाइक करें

👉 ख़बर सच है से टेलीग्राम (Telegram) पर जुड़ें

👉 हमारे पोर्टल में विज्ञापन एवं समाचार के लिए कृपया हमें [email protected] पर ईमेल करें या +91 97195 66787 पर संपर्क करें।

TAGS: Devbhoomi News Grand inauguration of the ten-day Navratri festival and grand religious conference at Shri Divyeshwar Mahadev Temple Hindi News Khabar Sach Hai riport . News from the hills News From the Pahad ramnagar news Swami Shri Hari Chaitanya Puri Ji Maharaj Uttrakhand news world-renowned saint and head of Shri Hari Kripa Peeth उत्तराखण्ड न्यूज धार्मिक न्यूज रामनगर न्यूज श्री हरि कृपा पीठाधीश्वर व विश्व विख्यात संत स्वामी श्री हरि चैतन्य पुरी जी महाराज

More Stories

शिक्षा-आध्यात्म

जहां संकल्प है, वहां कुछ भी असंभव नहीं – श्री हरि चैतन्य महाप्रभु 

ख़बर शेयर करें -

ख़बर शेयर करें –    खबर सच है संवाददाता    रामनगर। प्रेमावतार, युगदृष्टा, श्री हरि कृपा पीठाधीश्वर व विश्व विख्यात संत स्वामी श्री हरि चैतन्य पुरी जी महाराज ने आज यहां श्री हरि कृपा आश्रम में उपस्थित विशाल भक्त समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि संकल्प की शक्ति अपरिमित है। संकल्प कालजयी है संकल्प […]

Read More
शिक्षा-आध्यात्म

मुस्कान मानव मुख पर सौभाग्य का प्रतीक – श्री हरि चैतन्य महाप्रभु

ख़बर शेयर करें -

ख़बर शेयर करें –    खबर सच है संवाददाता    रामनगर पधारने पर श्री हरि चैतन्य महाप्रभु का हुआ भव्य स्वागत    रामनगर। प्रेमावतार, युगदृष्टा, श्री हरि कृपा पीठाधीश्वर व विश्व विख्यात संत स्वामी श्री हरि चैतन्य पुरी जी महाराज ने आज यहां श्री हरि कृपा आश्रम में उपस्थित विशाल भक्त समुदाय को संबोधित करते […]

Read More
शिक्षा-आध्यात्म

ईश्वर कृपा से जो भी मिला है उसका सदुपयोग करें – श्री हरि चैतन्य महाप्रभु

ख़बर शेयर करें -

ख़बर शेयर करें –    खबर सच है संवाददाता    गढीनेगी। प्रेमावतार, युगदृष्टा, श्री हरिकृपा पीठाधीश्वर व विश्व विख्यात संत स्वामी श्री हरि चैतन्य पुरी जी महाराज ने यहाँ श्री हरिकृपा धाम आश्रम में भक्तो को संबोधित करते हुए कहा कि हम सभी अपने महापुरुषों, तीर्थों, शास्त्रों व परमात्मा के विभिन्न अवतारों से प्राप्त होने […]

Read More