खबर सच है संवाददाता
देहरादून। उत्तराखंड में शहरी गवर्नेस को आधुनिक तकनीक से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार अब बिजली, पानी, ट्रैफिक, सड़क, परिवहन और स्वच्छता जैसी शहरी समस्याओं के समाधान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का उपयोग करेगी। इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत देहरादून के राजपुर रोड और सहस्रधारा रोड से की जा रही है।
शहरी विकास एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा एक एआई आधारित पायलट प्रोजेक्ट पर कार्य शुरू कर दिया गया है। इस परियोजना का उद्देश्य शहर की बुनियादी समस्याओं की डिजिटल पहचान कर तेज़, सटीक और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है।
पायलट प्रोजेक्ट का दायरा
इस पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत देहरादून के प्रमुख और व्यस्त मार्गों को शामिल किया गया है।
क्लोज-लूप रूट:
• राजपुर गांव ->>राजपुर रोड→घंटाघर
• सहस्रधारा क्रॉसिंग सहस्रधारा रोड ->> आईटी पार्क
पांच मॉड्यूल में होगा एकसाथ काम
इस एआई सिस्टम के माध्यम से एक साथ पांच प्रमुख क्षेत्रों पर निगरानी और कार्रवाई की जाएगी:
1. बुनियादी ढांचा – सड़कों, नालियों, साइनबोर्ड और
स्ट्रीट लाइट की स्थिति
2. स्वच्छता व्यवस्था – कूड़े के ढेर और गंदगी वाले
हॉटस्पॉट की पहचान
3. अतिक्रमण नियंत्रण – अवैध होर्डिंग्स और अतिक्रमण
का पता लगाना
4. ट्रैफिक अनुशासन – अवैध पार्किंग पर निगरानी
5. सड़क सुरक्षा – बिना हेलमेट वाहन चलाने वालों की पहचान
कैसे काम करेगी एआई प्रणाली?
विशेष कैमरों से लैस वाहन शहर की सड़कों की तस्वीरें लेंगे। इन तस्वीरों का विश्लेषण एआई मॉडल द्वारा किया जाएगा। इसके बाद फील्ड स्तर पर डेटा की भौतिक पुष्टि होगी। संपूर्ण जानकारी को एक डिजिटल डैशबोर्ड और मैपिंग सिस्टम पर प्रदर्शित कियाजाएगा, जिससे अधिकारी तुरंत कार्रवाई कर सकेंगे। यह प्रक्रिया शुरुआत में हर 15 दिन, फिर हर महीने, और बाद में साल में दो बार नियमित रूप से दोहराई जाएगी।
शहरी विकास एवं सूचना प्रौद्योगिकी सचिव नितेश झा के अनुसार, यदि यह पायलट प्रोजेक्ट देहरादून में सफल रहता है, तो इसेभविष्य में उत्तराखंड के अन्य शहरों में भी लागू किया जाएगा।
यह पहल उत्तराखंड को स्मार्ट गवर्नेस, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल अर्बन मैनेजमेंट की दिशा में एक नई पहचान दिला सकती है।