खबर सच है संवाददाता
हल्द्वानी। प्रेमावतार, युगदृष्टा, श्री हरि कृपा पीठाधीश्वर व विश्व विख्यात संत स्वामी श्री हरि चैतन्य पुरी जी महाराज ने उपस्थित विशाल भक्त समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि श्रद्धा, विश्वास और प्रेम तीनों ही यदि जीवन में उतर जाए तो संतोष और सच्चे आनंद की अनुभूति होने लगती है। यह तीनों कि वह त्रिवेणी है जो जीवन यात्रा में निरसरता हटाकर जीवन में सरसता भरती है तथा हमारे अंतःकरण की मलीनता को दूर करती है। हमें अश्रद्धा, अविश्वास और वैर से सदैव दूर रहना चाहिए,तभी जीवन में सच्ची सुख शांति मिल सकती है।
यदि इंसान शांतिपूर्वक जीना चाहता है तो उसे श्रद्धा, विश्वास और प्रेम को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाना चाहिए। आधुनिक जीवन शैली में रची बसी जटिलताएं और तनावपूर्ण स्थितियों से निपटने के लिए यदि हम इन तीन शब्दों के महत्व को जान लें तो कलह-क्लेश, दुख-शोक और कष्ट आदि सब मिलकर भी हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते। आध्यात्मिक शक्ति के संरक्षण और संवर्धन के लिए मन में श्रद्धा होनी अति आवश्यक है।कहा कि श्रद्धा हमारे अहंकार को दूर करती है। श्रद्धावश ही हम दूसरों का हृदय से सम्मान करते हैं। श्रद्धा का प्रतिफल हमें आशीर्वाद के रूप में प्राप्त होता है। श्रद्धा का परिणाम सदैव शुभदायक और मंगलकारी होता है, इसलिए श्रद्धावान व्यक्ति विषम परिस्थितियों में भी अपने आत्मबल के सहारे टिका रहता है।सच्चे श्रद्धालुओं के सभी संकल्प पूर्ण हो जाते हैं। यदि हमारा मन निर्मल है हमारी मनोभूमि में अवगुणों का प्रदूषण नहीं है। और हम दुर्व्यसनों के शिकार नहीं है तो श्रद्धा, विश्वास और प्रेम के अंकुर पल्लवित होने में देर नहीं लगती। हम शीघ्र ही श्रद्धानत हो जाते हैं, भगवान के कृपा पात्र बन जाते हैं। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है जैसी जिसकी श्रद्धा होती है वैसा ही उसका स्वरूप हो जाता है, क्योंकि श्रद्धा सदैव अंत:करण के अनुरूप होती है ,इसलिए मनुष्य को सदैव सात्विक श्रद्धा से युक्त रहना चाहिए।
महाराज श्री ने कहा कि दृढ़ता, संयम, त्याग व तद्नुकुल आचरण इन चारों के एकत्रित होने पर ही सफलता प्राप्त होती है।योग्यता से अधिक महत्वकांक्षी नहीं होना चाहिए। भूतकाल से प्रेरणा लें, भविष्य के लिए योजना चाहे बनाए, लेकिन जीएँ वर्तमान में। सबसे महत्वपूर्ण समय वर्तमान है उसका उत्तम से उत्तम उपयोग करें। सबसे महत्वपूर्ण काम वर्तमान में जो तुम्हारे सामने है उसे सावधानी से संपन्न करें। सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति वह है जो वर्तमान में तुम्हारे सामने हैं उसके साथ सम्यक रीति से व्यवहार करें। साधु का वेष बनाकर भी समाज को धोखा देना महापाप है। कामनाओं को सीमित करें इनका कोई अंत नहीं। यह हृदय को पीड़ित करती हैं।कि सच्चा भाव ही सच्ची उपासना है। सच्चे हृदय से प्रेम व श्रद्धा पूर्वक की गई प्रार्थना को परमात्मा अवश्य ही सुनते हैं। चाहे व्यक्ति को वेद,शास्त्र, पुराणों का ज्ञान चाहे ना हो। आज हमारी, हमारे परिवार की देश की व समाज की जो दुर्दशा हो रही है। विभिन्न प्रयास करने के बावजूद जिससे हम उबर नहीं पा रहे। प्रयास के साथ-साथ प्रभु से उनकी कृपा की याचना से परिपूर्ण भाव सहित प्रार्थना भी करनी चाहिए।
अपने धारा प्रवाह प्रवचनों से महाराज श्री ने सभी को मंत्रमुग्ध व भाव विभोर कर दिया।सारा वातावरण “श्री गुरू महाराज,” कामां के कन्हैया व लाठी वाले भैय्या की जय जयकार से गूंज उठा।
कल दिनभर के अत्यधिक व्यस्त कार्यक्रमों में परम पूज्य महाराज श्री देहरादून में अनेक स्थानों पर, जौली एयर पोर्ट के पास, हरिद्वार, नजीबाबाद, शेरकोट व जसपुर में स्थान स्थान पर विशाल भक्त समुदाय ने भव्य हार्दिक स्वागत किया। अत्यधिक व्यस्तता के बावजूद दैनिक जागरण समूह के हल्द्वानी में आयोजित कार्यक्रम में भी विशेष आमंत्रण पर महाराज श्री अति विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे। इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, सांसद अजय भट्ट, बड़ी संख्या में मंत्री, विधायक व भाजपा व कांग्रेस के वरिष्ठ राजनेता, बड़ी संख्या में अधिकारी एवं महाराज श्री के शिष्य उपस्थित रहे ।