editorial

सम्पादकीय

कर्क राशि में चंद्रमा के चलते 2012 जैसी ही तस्वीर उभर कर सामने आ सकती है

  मत पेटी सील हो गई अब जीत किसकी और हार किसकी यह तो आने वाला दिन ही बतायेगा, लेकिन ज्योतिष शास्त्रों का अंक गणित कह रहा कि अबकी बार फिर से 2012 जैसी ही तस्वीर उभर कर सामने आ रही है। मतलब कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में उभर कर सरकार बनाने की […]

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सम्पादकीय

डॉ इंदिरा के विकास से प्रभावित जनता बोली “मॉ के अधूरे सपने बेटा करेगा पूरे”

  सेवा के संकल्प के साथ विकास की पर्याय रही डॉ इंदिरा के दृष्टिकोण से हर कोई वाकिफ है। डॉ इंदिरा ने ना सिर्फ विकास को तबज्जो दी वरन यहां के लोगो के लिए एक मजबूत संरक्षक भी रही। यही वजह है कि आज जन मानस की जुबां पर “मॉ के अधूरे सपने बेटा करेगा पूरे” का […]

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सम्पादकीय

इस दौर में इंसान का चेहरा नहीं मिलता….

प्रसिद्व कूटनीतिज्ञ एवं दार्शनिक चाणक्य ने कहा था कि “जिस प्रकार जिह्वा के लिए परखे हुए शहद का स्वाद न लेना असंभव है,उसी प्रकार सत्ता से चिपके नेता के लिए जनता एवं विकास को नजरअंदाज कर राजस्व के अंश व सत्ता सुख का स्वाद न लेना असंभव है।” हमारा इतिहास बताता है कि रामायण-महाभारत कालों […]

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उत्तराखण्ड

अपने ही गिराते है चिलमन में बिजलियां…

भेड़तन्त्र में नेता कितने वजन और कितने चुपड़े चेहरे का है जनता का इससे न कभी सरोबार रहा और नहीं रहेगा, क्योंकि वर्तमान परिपेक्ष्य में शागिर्द एवं सिपहसालार ही नेता की समयानुकूल वैल्यू को जनता के समक्ष रखने में महत्वपूर्ण घटक होते है।  पियादा बना नेता के लिए वजीर की भूमिका अदा कर रहे शागिर्द […]

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सम्पादकीय

लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है…

कभाड़ की गाड़ियों को ढ़ोने के लिए क्रेन मंगाते है यह तो खूब सुना है, लेकिन कभाड़ की क्रेन सड़क से गाड़ी उठा कर गंतब्य तक ले जाए क्या मुमकिन है? ऐसा ही कुछ आज मीडिया की सुर्खियां बना वक्तब्य उनके मुखारबिंद से सुनने को मिल रहा है, जिनका खुद का अस्तित्व नहीं। फील्ड पर खेल […]

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सम्पादकीय

वो इस कमाल से खेला था इश्क की बाजी…

पहले हरदा का रणजीत के दुर्ग रामनगर में चुनावी ताल ठोकना फिर चौकाने वाले अंदाज में बागियों के गल बाहें डालते हुए पूर्व महिला प्रत्याशी की जगह स्वयं लालकुआं के रण में कूदना, आमजन को बेशक सामान्य सी बात लगती हो, लेकिन हकीकत में यह एक सोची समझी राजनीती का हिस्सा रहा है। 2017 के […]

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सम्पादकीय

स्वार्थ और बाहरी फिसलन पर नहीं जन भावनाओं के अनुरूप प्राप्त होती है विजयश्री

  विधानसभा चुनाव 2022 के लिए कांग्रेस -भाजपा सहित अब यूकेडी में भी प्रत्याशियों की लिस्ट में सम्मिलित नहीं होने के चलते बगावत शुरू हो गई है। 11 प्रत्याशियों की लिस्ट में कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष रणजीत रावत का नाम नहीं होने से नाराज रणजीत ने पार्टी के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है तो लालकुआं से पूर्व कैबिनेट […]

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सम्पादकीय

कहीं ऐसा तो नहीं कि 11 नए नामकरण के साथ ही कांग्रेस ने बीजेपी को फिर से दे दी क्लीन स्वीप

माहौल भी था और मौका भी, लेकिन भितरघात का अवसर देकर शायद कांग्रेस ने पुनः एक बार फिर से बहुमत से पिछड़ते हुए बीजेपी को अवसर दे दिया सरकार बनाने का। लालकुआं, कालाढूंगी सहित रामनगर सीट से बगावती सुरो को तूल देने के साथ पिछले चुनाव में दो सीटों से चुनाव की हार का ग्रहण हटाने कांग्रेस […]

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सम्पादकीय

चुनाव से पूर्व डेमेज कंट्रोल के कुशल प्रबंधन पर निर्धारित होगा जीत-हार का परिणाम

जनता के लिये बेशक उचित प्रतिनिधी साबित हो या न लेकिन राजनीती की पाठशाला में जन प्रतिनिधी कहलाने के लिए बड़े से लेकर छुटभैय्ये भी बेताब रहते है। लिहाजा लम्बे समय से आकाओं की चरण पादुकाएं उठाए घूमते अथवा हां में हां मिलाते इन तथाकथितो को पार्टी द्वारा स्थान न मिल पाने पर इनका मुह […]

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सम्पादकीय

विकास के मद्देनजर मानवीय मूल्यों की उपेक्षा अनुचित।

मनोज कुमार पाण्डे (सम्पादक) “खबर सच है”       मानवीय साहसिकता और सामाजिकता का तकाजा है कि जहां भी विभाजन की नीति दिखे, वहां उसके निराकरण का प्रयत्न किया जाए। सोचें कि आखिर ये स्थिति आई क्यों? यदि सीधे-टकराने की सामर्थ्य अथवा स्थिति न हो तो कम से कम असहयोग एवं विरोध की दृष्टि से जितना […]

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