सम्पादकीय
इस दौर में इंसान का चेहरा नहीं मिलता….
प्रसिद्व कूटनीतिज्ञ एवं दार्शनिक चाणक्य ने कहा था कि “जिस प्रकार जिह्वा के लिए परखे हुए शहद का स्वाद न लेना असंभव है,उसी प्रकार सत्ता से चिपके नेता के लिए जनता एवं विकास को नजरअंदाज कर राजस्व के अंश व सत्ता सुख का स्वाद न लेना असंभव है।” हमारा इतिहास बताता है कि रामायण-महाभारत कालों […]
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लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है…
कभाड़ की गाड़ियों को ढ़ोने के लिए क्रेन मंगाते है यह तो खूब सुना है, लेकिन कभाड़ की क्रेन सड़क से गाड़ी उठा कर गंतब्य तक ले जाए क्या मुमकिन है? ऐसा ही कुछ आज मीडिया की सुर्खियां बना वक्तब्य उनके मुखारबिंद से सुनने को मिल रहा है, जिनका खुद का अस्तित्व नहीं। फील्ड पर खेल […]
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वो इस कमाल से खेला था इश्क की बाजी…
पहले हरदा का रणजीत के दुर्ग रामनगर में चुनावी ताल ठोकना फिर चौकाने वाले अंदाज में बागियों के गल बाहें डालते हुए पूर्व महिला प्रत्याशी की जगह स्वयं लालकुआं के रण में कूदना, आमजन को बेशक सामान्य सी बात लगती हो, लेकिन हकीकत में यह एक सोची समझी राजनीती का हिस्सा रहा है। 2017 के […]
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स्वार्थ और बाहरी फिसलन पर नहीं जन भावनाओं के अनुरूप प्राप्त होती है विजयश्री
विधानसभा चुनाव 2022 के लिए कांग्रेस -भाजपा सहित अब यूकेडी में भी प्रत्याशियों की लिस्ट में सम्मिलित नहीं होने के चलते बगावत शुरू हो गई है। 11 प्रत्याशियों की लिस्ट में कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष रणजीत रावत का नाम नहीं होने से नाराज रणजीत ने पार्टी के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है तो लालकुआं से पूर्व कैबिनेट […]
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कहीं ऐसा तो नहीं कि 11 नए नामकरण के साथ ही कांग्रेस ने बीजेपी को फिर से दे दी क्लीन स्वीप
माहौल भी था और मौका भी, लेकिन भितरघात का अवसर देकर शायद कांग्रेस ने पुनः एक बार फिर से बहुमत से पिछड़ते हुए बीजेपी को अवसर दे दिया सरकार बनाने का। लालकुआं, कालाढूंगी सहित रामनगर सीट से बगावती सुरो को तूल देने के साथ पिछले चुनाव में दो सीटों से चुनाव की हार का ग्रहण हटाने कांग्रेस […]
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चुनाव से पूर्व डेमेज कंट्रोल के कुशल प्रबंधन पर निर्धारित होगा जीत-हार का परिणाम
जनता के लिये बेशक उचित प्रतिनिधी साबित हो या न लेकिन राजनीती की पाठशाला में जन प्रतिनिधी कहलाने के लिए बड़े से लेकर छुटभैय्ये भी बेताब रहते है। लिहाजा लम्बे समय से आकाओं की चरण पादुकाएं उठाए घूमते अथवा हां में हां मिलाते इन तथाकथितो को पार्टी द्वारा स्थान न मिल पाने पर इनका मुह […]
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बाहुबली नहीं योग्य प्रत्याशी का चयन ही समाज हित के अनुकूल
किसी शायर ने क्या खूब कहा है… “झूठ बोलते थे कितना, फिर भी सच्चे थे हम..ये उन दिनों की बात है,, जब बच्चे थे हम..” जिसे आज राजनीती की पृष्ठभूमि में बखूबी से देखने को मिल रहा है। मै शपथ लेता हूँ कि जनता की सेवा-सहायता के लिए स्वयं को समर्पित करते हुए अपना सम्पूर्ण […]
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अपनी बात पर रहोगे तभी तो मिशन 2024 फतह करोगे
मनोज कुमार पाण्डे (संपादक) खबर सच है प्रधानमंत्री के कटु आलोचक और भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद जैसा नाम वैसा गुण “स्वामी” चाहे जो भी बोले, पर यह तो अहसास करा ही देते है कि भाजपा ने यदि हिंदुत्व के नाम पर सत्ता हासिल की तो उसे हिन्दुतत्व की संरक्षा भी करनी ही होगी। अब जब अन्य […]
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विकास के मद्देनजर मानवीय मूल्यों की उपेक्षा अनुचित।
मनोज कुमार पाण्डे (सम्पादक) “खबर सच है” मानवीय साहसिकता और सामाजिकता का तकाजा है कि जहां भी विभाजन की नीति दिखे, वहां उसके निराकरण का प्रयत्न किया जाए। सोचें कि आखिर ये स्थिति आई क्यों? यदि सीधे-टकराने की सामर्थ्य अथवा स्थिति न हो तो कम से कम असहयोग एवं विरोध की दृष्टि से जितना […]
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सकारात्मक सोच के साथ जनहित में हो पत्रकारिता का उद्देश्य
मनोज कुमार पाण्डे (संपादक) “खबर सच है” यह कहने में कतई संकोच नहीं कि वर्तमान में पत्रकारिता आधुनिक सभ्यता का एक प्रमुख ब्यवसाय बन गया है। विधायिका, कार्यपालिका व न्यायपालिका के क्रियाकलापों पर नजर रखने को बना मीडिया जो चौथे स्तम्भ के रूप में जाना जाता है, आज जहा इसके सकारात्मक प्रभाव में अभिवृद्दि हुई है […]
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