हल्द्वानी। जिंदा मरीज को मृत घोषित करने के चलते शहर का चंदन हॉस्पिटल एक बार फिर गंभीर विवादों में घिरने से चर्चा में आ गया है। यहां अस्पताल में भर्ती 62 वर्षीय हेमा देउपा को अस्पताल के रिकॉर्ड में 15 फरवरी को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि वह अभी भी अस्पताल के आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर एडमिट बताई जा रही हैं।
परिजनों के अनुसार जब वे अस्पताल के दस्तावेज़ देखने पहुंचे, तो मरीज की फाइल में मृत्यु दर्ज होने की एंट्री मिली। यह देख परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई और अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। आरोप है कि अस्पताल ने बिना वास्तविक पुष्टि के ही मरीज को मृत घोषित कर दिया। इस चौंकाने वाली घटना के बाद परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
इससे पहले भी चंदन हॉस्पिटल पर कई गंभीर आरोप लग चुके हैं, जिनमें बकाया बिल का हवाला देकर मृतक का शव परिजनों को न सौंपना,अतिरिक्त भुगतान की मांग करना, इलाज में लापरवाही के आरोप समेत अनावश्यक जांच और भारी-भरकम बिल वसूली के आरोप आदी हैं। एक मामले में तो परिजन अस्पताल परिसर में ही धरने पर बैठ गए थे, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और दबाव में अस्पताल को शव सौंपना पड़ा।
बहरहाल सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिर आईसीयू में भर्ती जिंदा मरीज को अस्पताल रिकॉर्ड में मृत कैसे घोषित कर दिया गया? क्या यह केवल तकनीकी गलती है? या फिर अस्पताल की गंभीर लापरवाही?




