कुपथ पर चलकर अपनी शक्तियों को नष्ट ना करें- स्वामी श्री हरि चैतन्य महाप्रभु 

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खबर सच है संवाददाता 
 
रूद्रपुर।प्रेमावतार, युगदृष्टा,श्री हरिकृपा पीठाधीश्वर व विश्व विख्यात संत स्वामी श्री हरि चैतन्य पुरी जी महाराज ने आज वसुंधरा अवान विलाज़ में उपस्थित विशाल भक्त समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि सभी अपने अपने कर्तव्यों का पालन करें। इससे अधिकार प्राप्ति की लड़ाई समाप्त हो जाएगी। क्योंकि एक का कर्तव्य दूसरे का अधिकार है। वह व्यवहार औरों से ना करें जो तुम्हें अपने लिए अच्छा नहीं लगता। हम दूसरों को प्रेरणा, उपदेश या शिक्षा देने से पूर्व अपने जीवन में भी उतारे वरना उसका प्रभाव नहीं होगा।परमात्मा के नाम की महिमा का वर्णन किया। नाम को राम से भी बड़ा बताया।
 
कहा भारतीय संस्कृति में कदम कदम पर संस्कारों का भी उल्लेख व महत्व को प्रेमरस मर्मज्ञ महाराज श्री ने विस्तार से भक्तों को समझाया। उन्होंने कहा कि हम सभी को प्रभु व गुरु पर पूर्ण विश्वास रखते हुए तथा अपना आत्मविश्वास बढ़ाते हुए पूर्ण लगन व निष्ठा से अपने अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। स्वयं को शक्ति संपन्न बनाने का प्रयास करें। अपनी शक्तियों को गलत खानपान, अनियमित, असंतुलित, अनियंत्रित दिनचर्या,चरित्र हीनता व कुपथ पर चलकर नष्ट ना करें।शांति का दुरुपयोग ना हो जाए इसलिए बल के साथ साथ बुद्धि व विवेक का भी इस्तेमाल करें। एकमात्र धर्म व अध्यात्म ही हमें हमारे पतन,समाज में आ रही बुराइयों व विकृतियों से बचा सकता है। अतः सदा सर्वदा धर्म व परमात्मा की शरण ग्रहण करें।
महाराज श्री ने कहा कि संतों, शास्त्रों, महापुरुषों व अवतारों से प्रेरणाये, शिक्षाएं व उपदेश ग्रहण करके अपने जीवन को आदर्श दिव्य तो बनाए ही लेकिन जिन्हें हम नीच व अधर्मी मानते हैं अगर उनके जीवन से भी हमें कुछ अच्छाई मिल जाती है तो उसेभी अपने जीवन में उतारे। जिसको अच्छाई लेनी होती है तो वह नीच से नीच व्यक्ति से भी ग्रहण कर लेते हैं वरना दुर्योधन की तरह श्रीकृष्ण से भी नहीं।
 
महाराज श्री ने  कहा कि दुख, अशांति, कलेह-क्लेश, उलझन शोक भय, आदि से लाख प्रयास करके भी लोग बच नहीं पा रहे हैं। बहुत से लोगों को देखें तो उस हिरण की तरह है जो जाल में से निकलने की कोशिश करता है परंतु अपने सिंगो के भी कारण उस जाल में और भी फंसता चला जाता है। दुख-सुख,हानि-लाभ जीवन-मृत्यु, अनुकूल-प्रतिकूल, यश-अपयश इत्यादि विभिन्न प्रकार की परिस्थितियां आती जाती रहती है। संसार परिस्थितियाँ प्राणी-पदार्थ इत्यादि सभी परिवर्तनशील है, परंतु विचारशील प्राणी कभी भी किसी भी हाल में धर्म व परमात्मा का साथ कभी नहीं छोड़ता। सुख के साधन होना व सुखी होना दोनों में बहुत अंतर है। सच्चा सुख धर्म व परमात्मा की शरण में ही प्राप्त होगा। 
अपने धाराप्रवाह प्रवचनों से उन्होंने सभी भक्तों को मंत्रमुग्ध व भाव विभोर कर दिया। सारा वातावरण भक्तिमय हो गया व “श्री गुरु महाराज, कामां के कन्हैया व लाठी वाले भैय्या ” की जय जयकार से  गूंज उठा। 
 
इससे पूर्व महाराज श्री के किच्छा में अनेक स्थानों पर, रूद्रपुर में अनेक स्थानों पर बड़ी संख्या में भक्तों ने फूल मालायें पहनाकर, आरती उतारकर पुष्प वृष्टि करते हुए हार्दिक भव्य स्वागत किया । सुन्दर काण्ड पाठ का आयोजन किया गया । हर स्थान पर विशाल भण्डारे का आयोजन किया गया तथा श्री महाराज जी का अग्रिम पावन जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया ।

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