खबर सच है संवाददाता
किच्छा। प्रेमावतार, युगदृष्टा, श्री हरि कृपा पीठाधीश्वर व विश्व विख्यात संत स्वामी श्री हरि चैतन्य पुरी जी महाराज ने उपस्थित विशाल भक्त समुदाय को सम्बोधित करते हुए कहा कि विश्व शान्ति के अग्रदूत हमारे भारतवर्ष में आज अशांति दुर्भाग्यपूर्ण व चिंता का विषय है। अशांति के घटक ना बनें शांति का साम्राज्य स्थापित करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें।समय रहते जागरूक होकर निस्वार्थ भाव से मिलजुलकर राष्ट्र व समाजहित को सर्वोपरि रखते हुए यदि समुचित प्रयास किया जाए तो यहां भी शान्ति होगी ही तथा एक बार फिर सम्पूर्ण विश्व में शान्ति का संदेश यहीं से गूंज उठेगा। कहा कि आज सारे विश्व को शान्ति की आवश्यकता है। शान्ति मिलती है परन्तु दुर्भाग्यवश हम उसे स्थापित नहीं कर पाते। सुख और शान्ति विचारों में है, संतों व गुरुओं की शरण में है। यदि इंद्रियों पर नियंत्रण न हुआ तो भी हम शान्ति प्राप्त नहीं कर सकते। अच्छा बोलो, अच्छा सुनों, अच्छा देखो, अच्छा संग करो, अच्छा विचारो तथा कल्याणकारी संकल्प करो। यदि परमात्मा का स्मरण नहीं है तो हम कभी भी शान्ति नहीं पा सकते । हम चाहें तो अपनी ग़लतियों से भी सीख सकते हैं, नहीं तो साक्षात परमात्मा भी आ जाए तो हम उनसे भी कुछ नहीं सीख सकते। यदि एक बार हम अपना दृष्टिकोण बदल कर देखें तो हम को इस सृष्टि में वो अच्छाइयाँ नज़र आँएगी जिसकी हमने कल्पना भी नहीं की है।
उन्होंने कहा कि स्वयं जागो, औरों को जगाओ, अपने कल्याण के साथ औरों के कल्याण केभी भागीदार बनो।उठो, जागो कठिनाइयों, बाधाओं व परीक्षाओं से ना घबराकर निरंतर तब तक चलते रहो जब तक कि तुम्हें तुम्हारा लक्ष्य प्राप्त ना हो जाए। लक्ष्य विहीन मानव का जीवन घड़ी के पेंडुलम की भांति है जो हिलता डुलता है परंतु एक कदम भी आगे नहीं बढ़ता है। हनुमान जी की भांति मान का हनन करके भक्ति पथ की ओर अग्रसर हों। अभिमान प्रभु प्राप्ति में प्रमुख बाधक है। अभिमान चाहे रूप, धन, वैभव, तप, ज्ञान इत्यादि किसी प्रकार का क्यों ना हो, ठीक नहीं होता है। उन्होंने कहा कि मानव के जीवन पर संगति का प्रभाव अवश्य पड़ता है। इसलिए अच्छा देखो, अच्छा सुनो, अच्छा बोलो, अच्छा विचारों, अच्छा संग करो। खानपान व जीवन को सात्विक शुद्ध और संयमित बनाओ। खानपान का मन पर सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है। प्रकृति के नियमों का पालन करो। शांति को जीवन में प्रमुखता से स्थान दो। अशांत व्यक्ति को कहीं भी सुख नहीं मिलता। सत्य परमात्मा का स्वरुप है। सत्य जहां भी जुड़ेगा वहां विकृति नहीं आएगी। जिसे सत्यपुरुष, सत्वचन, सदव्यवहार, सदाचरण, सद्भभाव इत्यादि का संग मिले उसका जीवन धन्य है। जिसके जीवन में करुणा, क्षमा, उदारता, कोमलता सेवा, परोपकार, परमार्थ है वह संत है।
महाराज श्री ने कहा कि अधर्माचरण करने वाले कुमार्गगामी लोगों का संग त्यागकर, जितेंद्रिय, श्रेष्ठ महापुरुषों का संग व उनकी सेवा करके अपने जीवन को कल्याणमय बनाएं। क्योंकि सत्पुरुषों का आचरण व कार्य सदैव अनुकरणीय होता है। कहा कि सत्संग का प्रकाश हमारे अंतर्मन को प्रकाशित करता है और हमें भी उस ज्ञान रूपी प्रकाश को अपने अंतर मन में धारण कर परमपिता परमेश्वर को पाने का प्रयास करना चाहिए। मगर जब तक सत्य का संग नहीं होगा सत्संग से भी कोई लाभ प्राप्त हो नहीं सकेगा। जिस प्रकार सूरज की किरणें हमें तब तक लाभ नहीं पहुंचा सकती जब तक कि हमारे घरों की खिड़की दरवाजे बंद रहेंगे। ठीक उसी प्रकार हम गुरु व परमात्मा की कृपा के अधिकारी तभी बन सकते हैं जबकि हम उनके द्वारा दिए गए ज्ञान रूपी प्रकाश को अपने अंतर्गत में उतारेंगे।
अपने धारा प्रवाह प्रवचनों से उन्होंने सभी भक्तों को मंत्र मुग्ध व भाव विभोर कर दिया सारा वातावरण भक्तिमय हो उठा व “श्री गुरु महाराज “कामां के कन्हैया” व “लाठी वाले भैय्या” की जय जयकार से गूँज उठा।
बताते चलें कि कल किच्छा उत्तराखंड में आयोजित विराट धर्म सम्मेलन में पधारने पर हज़ारों हरि भक्तों ने परम पूज्य महाराज श्री का भव्य स्वागत किया। बैण्ड, ढोल व पारंपरिक वाद्ययो के साथ विशाल शोभायात्रा निकाली गई। संपूर्ण वातावरण हरिबोल, “श्री गुरु महाराज”, “कामां के कन्हैया” व “लाठी वाले भैय्या” की जय जयकार से गूंज उठा। अखण्ड राम चरित मानस का पाठ प्रारंभ हुआ व अनेक स्थानों पर स्वागत हुआ । दिनभर श्री महाराज जी के दर्शनों व अमृत वचनों को सुनने के लिए भक्तों का ताँता लगा रहा। सांय लोहड़ी का पर्व हज़ारों श्रद्धालुओं के साथ श्री महाराज जी ने मनाया। स्थानीय विधायक व पूर्व मंत्री तिलक राज बेहड, भाजपा व कांग्रेस के बड़ी संख्या में वरिष्ठ नेता भी उपस्थित रहे। दानपुर के ग्राम प्रधान ने भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के साथ श्री महाराज जी का स्वागत किया । आज प्रातः नित्य आरती के बाद 9 बजे मानस पाठ सम्पूर्ण हुआ, 10 बजे से भजन कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रम व श्री महाराज जी के दिव्य प्रवचन हुए। 1 बजे से विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में श्री महाराज जी ने दानपुर से आए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री मसई प्रसाद जी के परिवार का भी सम्मान किया।