खबर सच है संवाददाता
नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय में उपनल संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण और वेतनमान से जुड़े अवमानना मामले पर सुनवाई हुई। याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्षों से सरकारी विभागों में कार्यरत उपनल कर्मचारियों को अदालत के आदेश के बावजूद नियमित नहीं किया गया और उन्हें चयनित वेतनमान का लाभ भी नहीं दिया जा रहा है। साथ ही उनके वेतन से जीएसटी काटे जाने का भी विरोध किया गया है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि यदि उपनल कर्मचारियों को नियमित किया जाता है तो सरकार पर करीब 1300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। सरकार ने इस संबंध में निर्णय लेने के लिए अतिरिक्त समय मांगा।
वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि सरकार जानबूझकर अदालत के आदेश का पालन नहीं कर रही है और लगातार समय मांगकर मामले को टाल रही है, जो न्यायालय के आदेशों की अवहेलना है। इस पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि इस मामले में अब तक क्या निर्णय लिया गया है। अदालत ने सरकार को निर्देश दिए कि अगली सुनवाई, 28 मई तक अपना पक्ष स्पष्ट करे।
न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले का निस्तारण करते हुए याचिकाकर्ता को संबंधित अधिकारी के समक्ष प्रत्यावेदन देने के निर्देश दिए।




