अदालत ने कहा कि डिजिटल माध्यम आज सूचना का प्रमुख साधन बन चुका है। ऐसे में समाचार प्रसारण और विचार अभिव्यक्ति पर अनावश्यक प्रतिबंध उचित नहीं है। यदि कोई सामग्री जनहित में है और तथ्यों पर आधारित है, तो उसे रोका नहीं जा सकता।
साथ ही न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी जुड़ी होती है।भ्रामक समाचार, अपुष्ट जानकारी या किसी की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाली सामग्री कानूनन स्वीकार्य नहीं होगी।डिजिटल मंचों को सत्यता, संतुलन और सामाजिक मर्यादा का पालन करना होगा।साथ ही अदालत ने शासन-प्रशासन को निर्देशित किया कि डिजिटल मीडिया के विरुद्ध कोईभी कार्रवाई स्पष्ट कारणों और वैधानिक प्रक्रिया के तहत ही की जाए। बिना उचित आधार के की गई कार्रवाई न्यायसंगत नहीं मानी जाएगी।
यह निर्णय डिजिटल पत्रकारिता के लिए नई दिशा तय करता है। इससे स्पष्ट हो गया है कि न्यायालय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संरक्षण करेगा, लेकिन साथ ही अनुशासन और उत्तरदायित्व भी सुनिश्चित करेगा।




