समस्त कामनाओं का परित्याग करके ही मनुष्य ब्रह्म भाव को प्राप्त करता है : श्री हरि चैतन्य महाप्रभु 

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खबर सच है संवाददाता 
 
गढीनेगी पधारने पर श्री हरि चैतन्य महाप्रभु का हुआ भव्य व अभूतपूर्व स्वागत 
 
गढीनेगी। प्रेमावतार, युगदृष्टा, श्री हरि कृपा पीठाधीश्वर व विश्व विख्यात संत स्वामी श्री हरि चैतन्य पुरी जी महाराज ने रविवार (आज) यहाँ श्री हरि कृपा धाम आश्रम में उपस्थित विशाल भक्त समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि संत, गुरु, शास्त्र या ग्रंथ इनके पास क्या है यह इतना महत्वपूर्ण नहीं जितना यह कि श्रोता उनसे क्या ग्रहण करता है। बुद्धिमान वही कहलाता है जो व्यवहार करने से पूर्व विचार करता है। जबकि मूर्ख व्यक्ति व्यवहार के बाद विचार करता है उसे पश्चाताप, गिलानी व हास्य का पात्र बनना पड़ता है। अपने विवेक को कभी खोना नहीं चाहिए। स्व: सम्मान को कभी प्राप्ति का लक्ष्य नहीं बनाना चाहिए क्योंकि सम्मान को लक्ष्य बनाने पर यदि सम्मान नहीं मिला तो क्षुब्ध होना पड़ता है। विद्वान व्यक्ति अपनी संपूर्ण कामनाओं को संकुचित कर हर प्रकार के बंधनों से मुक्त हो जाता है। समस्त कामनाओं का परित्याग करके ही मनुष्य ब्रह्म भाव को प्राप्त करता है। सत्पुरुषों का आचरण व कार्य सदैव अनुकरणीय  होता है। 
 
उन्होंने कहा कि मानव मन को धर्म व अध्यात्म से ही नियंत्रित किया जा सकता है । इसलिए धर्म विहीन मनुष्य को पशु तुल्य कहा गया है ।आज लोगों के धर्म से भी विमुख होने के कारण ही मानवता की कमी भी दिखाई देने लगी है। हमें समाज को बदलने के लिए लोगों की दृष्टि बदलने की आवश्यकता है। किसी को सुधारने से पहले स्वयं को सुधारना चाहिए। बदले की भावना से वैर, क्षमा से प्रेम बढ़ता है। क्षमा कायरों का नहीं वीरों का आभूषण है। यदि सतंता के मार्ग पर बढ़ना चाहे तो अपने अन्दर क्षमा, करुणा, उदारता, कृपा आदि सद्गुणों  को अपनाएं। जीवन मरण, हानि लाभ, सुख दुख के कर्ता धर्ता प्रभू ही हैं। प्रभु का नाम पाप धोने वाली गंगा, विष- वैर  मिटाने वाला अमृत, दुर्जन को सज्जन बनाने वाली तंत्र, मोक्ष मिलने के मंत्र, भवसागर से पार उतारने वाली नौका व स्वर्ग जाने की सीढ़ी है । उन्होंने कहा कि जो आंखें विषय वासना, सांसारिक मोहमाया में फँसी है उन्हें परमात्मा नहीं दिखाई देते। जब संसार नहीं दिखता तो प्रभू दिखते हैं। सन्तों, शास्त्रों व अवतारों को मात्र अपनी कमियां छुपाने की ढाल ही ना बनाएँ। उनसे प्रेरणाएं, शिक्षाएँ व उपदेश भी ग्रहण करके अपने जीवन में उतारकर जीवन को दैवत्व परिपूर्ण बनाए। विचार शील प्राणी कभी भी किसी भी हाल में धर्म व परमात्मा का साथ कदापि भी नहीं छोड़ता। यूँ भी धैर्य, धर्म, मित्र व नारी इन चारों की परीक्षा विपत्ति के समय होती है। कब कौन सी बुद्धि उजागर हो जाए कोई कुछ कह नहीं सकता। हाँ अच्छे संग से सुमति व बुरे संग से कुमति ही उत्पन्न होगी।
 
अपने धाराप्रवाह प्रवचनों से उन्होंने सभी को मंत्रमुग्ध व भावविभोर कर दिया। सारा वातावरण भक्तिमय हो गया व “श्री गुरु महाराज”, “कामां के कन्हैया “, “लाठी वाले भैय्या” की जय जयकार से गूंज उठा ।
 
बताते चलें कि 9-12 जून 67वां श्री हरि प्राकट्योत्सव एंव विराट धर्म सम्मेलन वर्ष 2026 जून श्री हरि कृपा धाम आश्रम गढीनेगी में आयोजित होगा, जिसमें देश विदेश के लाखों श्रद्धालु धर्म लाभ अर्जित करने पहुँचेंगे। प्रदेश व देश के अनेक प्रमुख संत, अनेक प्रमुख राजनेता,देश के सुप्रसिद्ध गायक एवं बड़ी संख्या में कलाकार सांस्कृतिक कार्यक्रम करने पहुँचेंगे।
 
आज गढीनेगी पधारने पर विशाल भक्त समुदाय ने श्री महाराज जी का भव्य व अभूतपूर्व स्वागत किया। इस दौरान श्री महाराज ने श्री हरेश्वर महादेव का महाभिषेक भी किया ।

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