आचरण में लाए बिना ज्ञान की बातें केवल दंभ है- श्री हरि चैतन्य महाप्रभु   

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खबर सच है संवाददाता 
 
देशभर से पहुँच रहे हैं लाखों श्रद्धालु महाराज श्री के दर्शन को..
 
गढीनेगी। प्रेमावतार, युगदृष्टा, श्री हरि कृपा पीठाधीश्वर एंव विश्व विख्यात संत स्वामी श्री हरि चैतन्य पुरी जी महाराज ने यहाँ श्री हरि कृपा धाम आश्रम में उपस्थित विशाल भक्त समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि ज्ञान कोई वाणी विलास नहीं है जीवन में सदाचार,  संयम एवं भक्ति के आने पर जो ज्ञान स्वत: उत्पन्न होता है वही शाश्वत ज्ञान है। पुस्तकीय ज्ञान ज्यादा नहीं टिकता। ज्ञान अनुभव करें उसे जीवन में उतारें। मात्र दूसरों को उपदेश देने में ही नहीं स्वयं की मुक्ति के लिए उपयोग करें।आचरण में आए बिना ज्ञान की बातें मात्र दंभ व पाखंड है 
 
उन्होंने कहा कि संसार के सुख क्षणिक है। विषयों के ही क्षणिक सुख को प्राप्त करने के लिए मात्र यह अमूल्य जन्म नष्ट ना करो। चिन्ताएँ त्याग कर प्रभु चिंतन करो। सभी में परमात्मा के दर्शन करते हुए व्यवहार करो। जो समस्त संसार को प्रभुमय कहते हैं या देखते हैं। तो वे विरोध किससे करते हैं। वैर-विरोध, घृणा-द्वेष, अशांति इत्यादि त्यागो। कर्म, भक्ति व ज्ञान का जीवन में समन्वय स्थापित करो। ईश्वर व परमात्मा को सदैव याद रखो।सद्गुरु की कृपा से प्राप्त प्रभु नाम जपकर व कल्याणमय मार्ग पर चलने से व्यक्ति अवश्य ही भवसागर से पार उतर सकता है। दृढ़ विश्वास पूर्वक परमात्मा का नाम, जप भव रोगों की अचूक औषधि है। 
 
उन्होंने कहा कि माता-पिता, बड़े बुजुर्गों , संतो, महापुरुषों, तीर्थ, धर्म स्थलों व देश की संस्कृति का सम्मान करें। धर्म का साथ दें,  अधर्म के विनाश में सहयोग दें व शांति को जीवन में प्रमुखता से स्थान दें । 
 
उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में आप आगे बढ़ो तो कठिनाइयां, बाधाएं, परीक्षाएं, आना स्वाभाविक है प्रभु स्मरण करते हुए प्रभु नाम लेते हुए चलें तो, वो आपके सामने टिक नहीं पाएंगी, जैसे हनुमान जी सीता रूपी भक्ति को प्राप्त करने के लिए चले तो मार्ग में आने वाली बाधाओं को सहज में ही पार कर लिया। जो व्यक्ति विपत्तियों, बाधाओं व परेशानियों से लड़ने की क्षमता रखता हो वही जीवन के विकास का सच्चा आनंद प्राप्त कर सकता है।
 
उन्होंने कहा कि आराम तलब आदमी कभी भी लौकिक क्षेत्र में या पारलौकिक क्षेत्र में सफलता प्राप्त नहीं कर सकता‌ यदि कोई व्यक्ति किसी वस्तु पदार्थ को पाना चाहता है उसके लिए प्रयास करता है और यदि थक्कर बीच में अपना विचार ना बदल दे तो उसे अवश्य ही प्राप्त कर लेता है। यदि व्यक्ति पुरुषार्थ करें तो ईश्वर भी उसकी सहायता करता है। उन्होंने कहा कि सबसे महान व्यक्ति वह है जो दृढ़तम निश्चय के साथ सत्य का अनुसरण करता ह। जो व्यक्ति उद्योग वीर है वह कोरे वाग्वीर व्यक्तियों पर अधिकार जमा लेता है।  जिसे हमारा हृदय महान समझे वह महान है। आत्मा का निर्णय सदा सही होता है। किसी का तिरस्कार ना करें।जो भी देखें, सुने या पढ़ें उस पर विचार करें, किसी को भी नुकीले व्यंग बाण ना चुभायें अतार्थ ऐसा कुछ ना बोलें जिससे किसी के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचे। किसी का दिल दुखे या प्रेम, एकता,सद्भाव नष्ट हो जाए, अशांति हो जाए कलह- क्लेश या वैमनस्य पैदा हो जाए। हमारे हृदय उद्धार व विशाल होने चाहिए। आज मनुष्य का मस्तिष्क विशाल तथा हृदय सिकुड़ता चला जा रहा है। अकड़ या अभिमान नहीं होना चाहिए। 
 
अपने धारा प्रवाह प्रवचनों से उन्होंने सभी भक्तों को मंत्र मुग्ध व भावविभोर कर दिया। सारा वातावरण भक्तिमय हो उठा व “श्री गुरु महाराज” “कामां के कन्हैया” व “लाठी वाले भैय्या ”की जय जयकार से गूंज उठा।श्री महाराज जी के दर्शनों व दिव्य प्रवचनों को सुनने के लिए क्षेत्रीय, स्थानीय व दूर दराज से काफ़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं । 
 
12 जून को परम पूज्य श्री महाराज जी का पावन प्राकट्योत्सव जन्मोत्सव हमेशा की भाँति भारत सहित सम्पूर्ण विश्व के 365 से भी अधिक स्थानों पर मनाया जाएगा । 14 मार्च से ही श्री महाराज जी जहां भी पधार रहे हैं हरि भक्त धूमधाम से जन्मोत्सव मना रहे हैं ।
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