खबर सच है संवाददाता
कौशांबी। कौशांबी के महेवाघाट इलाके के अलवारा गांव में एक महिला, जिसकी ‘हत्या’ के आरोप में उसका पति सलाखों के पीछे दिन काट रहा था,वह न केवल जिंदा मिली बल्कि हरियाणा में अपने मौसेरे भाई (प्रेमी) के साथ सुरक्षित रह रही थी।
जानकारी के अनुसार अलवारा गांव की रहने वाली एक महिला संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी। जिस पर महिला के पिता ने अपनी बेटी की हत्या की आशंका जताते हुए उसके पति पर मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद पति को मुख्य आरोपी मानते हुए जेल भेज दिया। पति महीनों से जेल की कालकोठरी में अपनी बेगुनाही की गुहार लगा रहा था, लेकिन कानून की नजर में ‘कातिल’ बने पति की किसी ने नहीं सुनी।
लेकिन मामले में नया मोड़ तब आया जब पुलिस को सूचना मिली कि महिला जीवित है। सर्विलांस और मुखबिरों की मदद से पुलिस ने महिला को हरियाणा से बरामद किया। पता चला कि महिला का अपने मौसेरे भाई के साथ प्रेम संबंध था और वह अपनी मर्जी से उसके साथ भाग गई थी। हैरान कर देने वाली बात यह है कि महिला के पिता और परिजनों को उसके जिंदा होने की जानकारी थी, फिर भी उन्होंने दामाद को फंसाने के लिए हत्या का झूठा नाटक रचा। पुलिस ने अब इस मामले में महिला के पिता और पुत्र सहित चार लोगों के खिलाफ साजिश रचने, पुलिस को गुमराह करने और हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करते हुए आरोपी पिता और भाई को गिरफ्तार कर लिया है।
इस घटना के बाद जहां कौशांबी पुलिस की प्रारंभिक विवेचना की पोल खुली, वहीं अब यह सवाल भी उठ रहे हैं कि बिना किसी ठोस सबूत या शव की बरामदगी के पति को जेल कैसे भेज दिया गया? क्या पुलिस ने मामले की गहराई से छानबीन करने के बजाय केवल आरोपों के आधार पर कार्रवाई की?
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला पारिवारिक रिश्तों के पतन और कानूनी लापरवाही का चरम है। एक बेगुनाह व्यक्ति को बिना किसी गलती के जेल की प्रताड़ना झेलनी पड़ी। लोगों ने मांग की है कि लापरवाह पुलिसकर्मियों और झूठा केस दर्ज कराने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई हो ताकि भविष्य में कोई निर्दोष न फंसे।




