आज मन बहुत बेचैन है… दिल में एक अजीब-सा खालीपन है। आज हमारे बीच से वह शख्स चला गया, जिसे हम पत्रकारों का संरक्षक, मार्गदर्शक और बेहद दिलखुश इंसान मानते थे।
गिरजा शंकर जोशी के अचानक चले जाने की खबर ने भीतर तक झकझोर दिया। मन बार-बार उस शख्स को याद कर रहा है, जिनके पास जाते ही अपनापन महसूस होता था।
उनसे मिलने का एक छोटा-सा लेकिन बेहद खूबसूरत किस्सा हमेशा याद रहेगा—
जब भी उनके पास जाते थे, वह चाय पिलाए बिना कभी नहीं भेजते थे। वह चाय सिर्फ चाय नहीं होती थी… उसमें उनका अपनापन, स्नेह और रिश्तों की गर्माहट होती थी। कुछ देर बैठना, बातें करना और फिर उनकी आत्मीयता के साथ चाय का वह प्याला… आज सब कुछ आंखों के सामने घूम रहा है। आज सोचता हूं कि इंसान चला जाता है, लेकिन उसकी छोटी-छोटी बातें और यादें हमारे भीतर हमेशा जीवित रहती हैं।
पत्रकारिता की राह में कई चेहरे मिलते हैं, लेकिन कुछ लोग अपनी व्यवहारिक सरलता और अपनत्व से दिल में ऐसी जगह बना लेते हैं, जिसे समय भी मिटा नहीं पाता। गिरजा शंकर जोशी जी भी उन्हीं लोगों में से एक थे।
आज उनसे मिलने की इच्छा है…
आज फिर उनके साथ बैठकर चाय पीने का मन है, लेकिन अफसोस, अब वह आवाज सुनाई नहीं देगी— “आओ बैठो, पहले चाय पी लो…” यही तो जिंदगी की सबसे बड़ी सच्चाई है—
कुछ मुलाकातें आखिरी होती हैं और हमें पता भी नहीं चलता गिरजा शंकर जोशी, आपका यूं अचानक चले जाना स्वीकार करना बेहद कठिन है। आपकी मुस्कान, आपका अपनापन, आपकी आत्मीयता और वह चाय का प्याला… सब हमेशा याद रहेगा। आप हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन आपकी यादें हमेशा हमारे साथ रहेंगी।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और परिवार सहित सभी शुभचिंतकों को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें।
भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
ॐ शांति।




