गढीनेगी। प्रेमावतार, युगदृष्टा, श्री हरि कृपा पीठाधीश्वर व विश्व विख्यात संत स्वामी श्री हरि चैतन्य पुरी जी महाराज ने यहां श्री हरि कृपा धाम आश्रम में उपस्थित विशाल भक्त समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि प्यार बहुत ही छोटा सा शब्द है अगर सच्चा हो तो सारी दुनिया का मालिक भी इससे वश में हो जाए तो कोई बड़ी बात नहीं। प्रेम ही ईश्वर है, ईश्वर ही प्रेम है, बशर्ते वह प्रेम विशुद्ध हो, निष्काम हो, निस्वार्थ हो, निष्कपट हों ऐसा विशुद्ध, निस्स्वार्थ, निष्कपट प्रेम परमात्मा का ही स्वरूप है जब यह स्वभाविक हमारे मन में उत्पन्न होतो लगता है कि सामने वाला कौन है कही ये साक्षात परमात्मा तो नहीं है। लेकिन स्थिर नहीं रहती है बुद्धि, प्रेम, आस्था विश्वास। ये परमात्मा नहीं है तो परमात्मा का कोई निकट जन है ये सदियों से लगता आया है क्योंकि अंत में स्वाभाविक प्रेम परमात्मा या परमात्मा के निज जन के प्रति ही उत्पन्न हो सकता है। परंतु आज दुर्भाग्यवश इसी प्रेम का अभाव सर्वत्र दिखाई देता है आज मूर्खतावश लोग वासनामय संबंधों को प्रेम कह देते हैं जो कि प्रेम का भी अपमान है।
महाराज श्री ने कहा कि सम्मान प्राप्ति को लक्ष्य कभी नहीं बनाना चाहिए वरना कितना भी सम्मान प्राप्त होने के बावजूद थोड़े से कहीं से ना मिला तो भी क्षुब्ध ही रहेंगे। हर कार्य सोच समझ कर करना चाहिए।किसी से मित्रता करनी होतो सोच विचार कर करनी चाहिए। क्रोध अपमान किसी का अनिष्ट अप्रिय व पाप कर्म करने में ज्यादा से ज्यादा देर करनी चाहिए। किसी के अपराध करने पर उसे शीघ्र दंड नहीं देना चाहिए, बहुत सोच समझ कर ही देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दूसरों को नुकसान पहुंचाने वाले का अपना ही नुकसान होता है। यदि दूसरा हमें नुकसान पहुंचाए तो हम बचाव की स्थिति अपनाएं आक्रमक दृष्टि ना होने दें। क्षमाशील बनें। क्षमा कायरों का नहीं अपितु वीरों का आभूषण है। मानव पर जगत व जगतपति दोनों का अधिकार है। लेकिन मानव का इन पर अधिकार मानना अज्ञानता है । अपने दिव्य प्रवचनों में भक्तों को कृतार्थ करते हुए उन्होंने कहा कि जगत की चिंता करे, जगतपति। जगत को सुधारने की चिंता यदि हम करें तो जगत सुधरेगा या नहीं पर हम जरूर बिगड़ जाएंगे। समाज सुधारक नहीं समाज सेवक बनने का प्रयास करें।मानव जीवन की ही महिमा है कि वह अपने लिए समाज के लिए व परमात्मा के लिए उपयोगी हो सकता है। त्याग पूर्वक शांत होकर अपने लिए उदारता पूर्वक सेवा करके समाज के लिए व आत्मीयता पूर्वक प्रेम करके परमात्मा के लिए उपयोगी होता है। शांत उदारवाद प्रेमी भक्त हो जाना यह मानव जीवन की ही महिमा है।
उन्होंने कहा कि अधर्माचरण करने वाले कुमार्गगामी लोगों का संग त्यागकर, जितेंद्रिय, श्रेष्ठ महापुरुषों का संग व उनकी सेवा करके अपने जीवन को कल्याणमय बनाएं। क्योंकि सत्पुरुषों का आचरण व कार्य सदैव अनुकरणीय होता है। सत्संग का प्रकाश हमारे अंतर्मन को प्रकाशित करता है और हमें भी उस ज्ञान रूपी प्रकाश को अपने अंतर मन में धारण कर परमपिता परमेश्वर को पाने का प्रयास करना चाहिए। मगर जब तक सत्य का संग नहीं होगा सत्संग से भी कोई लाभ प्राप्त हो नहीं सकेगा। जिस प्रकार सूरज की किरणें हमें तब तक लाभ नहीं पहुंचा सकती जब तक कि हमारे घरों की खिड़की दरवाजे बंद रहेंगे। ठीक उसी प्रकार हम गुरु व परमात्मा की कृपा के अधिकारी तभी बन सकते हैं जबकि हम उनके द्वारा दिए गए ज्ञान रूपी प्रकाश को अपने अंतर्गत में उतारेंगे।
अपने धारा प्रवाह प्रवचनों से उन्होंने सभी को मंत्रमुग्ध व भाव विभोर कर दिया । सारा वातावरण “श्री गुरु महाराज”, “कामां के कन्हैया “व “लाठी वाले भैय्या” की जय जयकार से गूंज उठा ।
ख़बर शेयर करें – खबर सच है संवाददाता श्री हरेश्वर महादेव व श्री दिव्येश्वर महादेव की सजाई गई दिव्य झांकी रामनगर। श्री हरि कृपा आश्रम चित्रकूट रामनगर में स्थित श्री दिव्येश्वर महादेव व श्री हरि कृपा धाम आश्रम गढीनेगी में स्थित श्री हरेश्वर महादेव की आज भव्य व दिव्य […]
ख़बर शेयर करें – खबर सच है संवाददाता कामां। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्री हरि कृपा आश्रम, कामां, जिला डीग (राजस्थान) में आयोजित दो दिवसीय विराट गुरु पर्व सम्मेलन का दूसरा दिन आध्यात्मिक आस्था, भक्ति और राष्ट्रभक्ति के अद्भुत संगम का साक्षी बना। प्रातःकाल अखंड रामचरितमानस पाठ का विधिवत पूर्णाहुति […]
ख़बर शेयर करें – खबर सच है संवाददाता कामां। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर श्री हरी कृपा आश्रम कामां जिला ढीक (राजस्थान) में आयोजित दो दिवसीय विराट धर्म सम्मेलन के पहले दिन प्रातः 7 बजे प्रेमावतार, युगदृष्टा, श्री हरि कृपा पीठाधीश्वर स्वामी श्री हरि चैतन्य महाप्रभु जी के सानिध्य में विशाल कलश यात्रा का […]