सम्पादकीय
भ्रस्टाचार के खिलाफ एकजुट होने की आवश्यकता।
मनोज कुमार पाण्डे (संपादक) “खबर सच है” भ्रस्टाचार हमारी प्रमुख और भयंकरतम समस्या हैं। भ्रस्टाचार का विषवृक्ष आम जनता के जीवन की हर सांस में विष घोल रहा हैं और दिन रात चौगुना फैल रहा हैं।क्योंकि इस विषवृक्ष को मिली हैं वह संवैधानिक भूमि जिसमें एक से अधिक सिविल कोर्ट और आरक्षण की ब्यवस्था हैं। […]
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“कितने चेहरों से उतर गए आज मुफ़लिसी के नकाब,कल तक जो कहते रहे देंगे रोटी आज पिला रहे शराब।”
मनोज कुमार पाण्डे यह बिडम्बना ही है कि पृथक राज्य बनने के बाद भी उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश के नक्शे कदम पर ही अग्रसित रहा है। यूपी बन्द तो उत्तराखंड बन्द और यूपी में ढील तो उत्तराखंड के आलाहुजुर के भी तेवर नरम पड़ गए। ब्यापारियों के थाली बजाने, गिरफ्तारी देने यहां तक की भीख मांगने […]
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शासन तंत्र की निष्क्रियता के चलते राज्य का समुचित विकास बाधक।
मनोज कुमार पाण्डेसंपादक “खबर सच है” विकास की सार्थक पहल का खोखला नारा देने वाली राज्य सरकार आखिर अपनी गिरगिट चाल चलने में कामयाब रही है। राज्य की यह दुर्दशा शायद आज पहली बार देखने को मिल रही। सड़क, यातायात, रोजगार शायद कोई भी ऐसा पहलू नहीं जिसमें सरकार, जनता के समक्ष अपने को सही […]
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ब्यवहारिक एवं उद्देश्यपूर्ण हो पत्रकारिता।
मनोज कुमार पाण्डे (सम्पादक) “खबर सच है” मित्रों “खबर सच है” का आज का यह आलेख आपके सम्मुख है। आज हजारों की संख्या में समाचार पत्र एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म खबरों का प्रकाशन कर रहे। उनमें से बहुत कम ऐसे है जिन्होंने समाचार पत्र को ब्यवसाय एवं पत्रकारिता को बिकाऊ न बनाते हुए इसकी वास्तविक उपयोगिता […]
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विकास विरोधी ताकतों के विरुद्ध जन जागृति से ही पर्वतीय राज्य की अवधारणा सम्भव।
मनोज कुमार पाण्डे – सम्पादक “खबर सच है” फोटो : साभार आदर्श राज्य का निर्माण, प्रत्येक युवा को रोजगार एवं महिलाओं के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाये जायेंगे, राज्य में लघु एवं कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जायेगा। औद्योगिक क्रान्ति के लिए ठोस रणनीति तय की जायेगी तथा और भी कई खोखले वादे, जो […]
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जंग तो चिकित्सकों ने लड़ी, हमने तो सिर्फ निर्देशो के साथ होंसला रखा।
मनोज कुमार पाण्डे – सम्पादक “खबर सच है” कोरोना से बाहर आए लोगो को मैने अक्सर यह कहते सुना है कि “जंग जीत आए..” लेकिन मुझे तो लगता है कि असल हीरो हमारे चिकित्सको द्वारा हमारे लिए युद्घ स्तर की कोशिश “जंग” से हम सकुशल सुरक्षित हो पाए।18 अप्रैल को सामान्य से लक्षणों ‘खाँसी एवं […]
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फासीवादी राजनीती से फिर गुलामी की ओर
मनोज कुमार पाण्डे – सम्पादक “खबर सच है” आजाद भारत के 74 वर्ष बाद हमारे देश की आधी से भी ज्यादा आबादी आज भी वैसे ही सोचने लगती हैं जैसा कि सियासी दल हमसे उम्मीद करते हैं। कभी धर्म-सम्प्रदाय तो कभी जाती-प्रन्थ के नाम पर जनता को सियासी मानसिकता अपना गुलाम बना कर। गुलामी से […]
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